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'दहशत में आकर दवा न ख़रीदें' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि टैमीफ़्लू नाम की दवा मनुष्यों में बर्ड फ़्लू को फैलने से नहीं रोक सकती और लोग जल्दबाज़ी में ये दवा न ख़रीदें. ये दवा मनुष्यों में बर्ड फ़्लू के असर को कम कर सकती है. इसके इस्तेमाल से सिर्फ़ उन लोगों का इलाज हो सकता है जो पहले ही बर्ड फ़्लू के वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. मनुष्यों में ये बीमारी संक्रमित पक्षियों से ही फैल सकती है मगर वैज्ञानिकों को डर है कि म्यूटेशन यानि उत्परिवर्तन के ज़रिए ये मानव से मानव में भी फैल सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन चाहता है कि उस सूरत में सरकारें टैमीफ़्लू दवा पहले सी ही जमा करके रखें. संगठन को चिंता है कि अगर लोग जल्दबाज़ी में बड़ी मात्रा में ये दवा ख़रीदते रहे तो इसकी कमी हो सकती है. बर्ड फ़्लू इस बीच ग्रीस में भी बर्ड फ़्लू का एक मामला सामने आया है. माना जा रहा है कि ग्रीस में एच5 विषाणु पाया गया है. उधर रोमानिया में बारह और पक्षियों में बर्ड फ़्लू होने की ख़बर है. रोमानिया में 21 दिनों तक घरेलू पक्षियों को अलग थलग करके रखा जाएगा. प्रभावित इलाकों में लोगों को भी टीके लगाए गए हैं. लेकिन ग्रीस और रोमानिया में हुए इन ताज़ा परीक्षणों में एच5एन1 विषाणु के होने की पुष्टि नहीं हुई है. एशिया में थाईलैंड में कुछ चिड़ियों में एच5एन1 विषाणु पाया गया है. तुर्की में अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है. सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि नौ लोगों के ख़ून के नमूने लिए गए हैं हालांकि उनमें बीमारी के लक्षण देखने को नहीं मिले हैं. यूरोपीय संघ ने क्रोएशिया में भी कुछ पक्षियों के परीक्षण के आदेश दिए हैं. यूरोपीय संघ रोमानिया और तुर्की से पोल्ट्री के आयात पर पहले ही रोक लगा चुका है. संघ के अध्यक्ष जोसे मनुएल बरोसो ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो कड़े क़दम उठाए जाएँगे. |
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