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भारत में भी पक्षियों की जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में अधिकारियों ने राज्य सरकारों से कहा है कि बर्ड फ़्लू के परीक्षण के लिए वे पक्षियों के नमूने भेजें. भारत में सिर्फ़ भोपाल की एक ही प्रयोगशाला बर्ड फ़्लू का परीक्षण करने के लिए अधीकृत है. जाँच के लिए आने वाले पक्षियों की संख्या से निपटने के लिए प्रोयगशाला ने कुछ और क्लिनिक खोलें हैं और कुछ विज्ञानकों को भी नियुक्त किया है. प्रयोगशाला के प्रमुख डॉक्टर एचके प्रधान ने बताया कि रूस और मध्य एशिया से आने वाले पक्षियों के ज़रिए वायरस भारत में आ सकता है. उन्होंने कहा कि इस प्रयोगशाला में पिछले चार सालों में 22 हज़ार पक्षियों का परीक्षण किया जा चुका है लेकिन किसी में भी एच5एन1 वायरस नहीं पाया गया. नियत्रंण कार्यक्रम साइबेरिया और रूस में सर्दी का मौसम शुरू होते ही प्रवासी पक्षी भारत का रुख़ करते हैं. डॉक्टर एचके प्रधान के मुताबिक वायरस प्रभावित प्रवासी पक्षियों के स्थानीय पक्षियों के संपर्क में आने से वर्ड फ़्लू भारत में फैल सकता है. उन्होंने कहा कि बर्ड फ़्लू से संक्रमित पक्षी अगर पोल्ट्री फार्म के नज़दीक रहते हैं तो ये भी पक्षियों के लिए ख़तरनाक है. डॉक्टर प्रधान के मुताबिक बर्ड फ़्लू का मामला सामने आने की सूरत में नियत्रंण कार्यक्रम पूरी तरह तैयार है. उन्होंने बताया कि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिस इलाक़े में ये मामला पाया जाएगा उसे दूसरे इलाक़े से काट दिया जाएगा और अगर पक्षी की मौत होती है तो उसे जला दिया जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मुँबई की नेचुरल हिस्टरी सोसाइटी से कहा है कि वो प्रवासी पक्षियों की आवाजाई पर नज़र रखे. इससे पहले यूरोपीय संघ के देश बर्ड फ़्लू के प्रसार को यूरोपीय देशों में फैलने से रोकने के लिए क़दम उठाने पर सहमत हो गए. गुरूवार को पुष्टि की गई थी कि तुर्की में जो विषाणु पाया गया था वह ख़तरनाक एच5एन1 है और इसी विषाणु से एशिया में साठ लोगों की मौत हो चुकी है. |
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