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तुर्की की सदस्यता के बारे में वार्ता शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए तुर्की ने औपचारिक तौर पर वार्ता शुरू कर दी है. तुर्की के विदेश मंत्री अब्दुल्ला गुल देर रात लक्समबर्ग पहुँचे जहाँ एक संक्षिप्त समारोह के बाद सदस्यता पर बातचीत शुरू हो गई. तुर्की की सदस्यता पर बातचीत, यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच 24 घंटे से भी अधिक समय तक की चर्चा के बाद शुरू हो सकी जिसमें अंतिम क्षणों में यूरोपीय संघ की शर्तों पर सहमति हो सकी. इससे पहले कूटनीतिक विवाद बहुत गहरा गया था जब ऑस्ट्रिया ने कहा कि तुर्की को पूर्ण सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए बल्कि इसके बदले उसे विशेष साझीदार का दर्जा दिया जाना चाहिए. लेकिन ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों के ज़ोर डालने के बाद ऑस्ट्रिया ने यह माँग छोड़ दी थी. बात इतनी बिगड़ गई थी कि तुर्की ने बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया था, इसके बाद यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने गहन चर्चा के बाद तुर्की को नया प्रस्ताव भेजा था जिसे उसने स्वीकार कर लिया. इस घोषणा के बाद तुर्की को यूरोपीय संघ में शामिल करने के लिए बातचीत करने का रास्ता साफ़ हो गया. ऐतिहासिक मोड़
लक्समबर्ग में एक समारोह में तुर्की की सदस्यता पर बातचीत का आरंभ यूरोपीय संघ की अध्यक्षता करनेवाले देश ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने किया. उन्होंने तुर्की से सेना और न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए ज़ोर देने और देश के कुर्द बहुल इलाक़ों में स्थिति बेहतर करने का आग्रह किया. तुर्की की राजधानी अंकारा से लक्ज़मबर्ग रवाना होने से पहले तुर्की के विदेश मंत्री अब्दुल्ला गुल ने कहा,"आज हम एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुँचे हैं और तुर्की ने एक नए युग में प्रवेश किया है". जैक स्ट्रॉ ने भी इस दिन को यूरोप और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया. वैसे उन्होंने कहा कि अभी लंबा रास्ता तय करना है और बातचीत पूरी होने में 10 वर्ष लग सकते हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा,"मुझे कोई संदेह नहीं है कि अगर इनाम ये है कि तुर्की को सदस्यता दिया जाना है, तो फिर ऐसे में लड़ाई करना ही बेहतर है". मतभेद दरअसल, सोमवार को तुर्की को यूरोपीय संघ में विधिवत शामिल किए जाने के सवाल पर औपचारिक बातचीत शुरू होने वाली थी लेकिन विवाद की वजह से वह शुरू नहीं हो सकी. किसी नए देश को शामिल किए जाने से पहले होने वाली बातचीत का मसौदा बाक़ी सदस्यों की सहमति से तैयार होता है. लेकिन ऑस्ट्रिया सहित यूरोप के कई देशों में तुर्की को पूर्ण सदस्यता देने का विरोध हो रहा है. विरोध की मुख्य वजह तुर्की का मुस्लिम बहुल राष्ट्र होना माना जा रहा है. मगर ब्रिटेन तुर्की की सदस्यता का समर्थन करता है और उसका कहना है कि तुर्की को पूर्ण सदस्य का दर्जा दिए जाने से बहुसांस्कृतिक ब्रिटेन के विचार को बल मिलेगा. |
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