| लिकुड पार्टी में नेतृत्व पर अहम बैठक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल में सत्ताधारी लिकुड पार्टी की आज महत्वपूर्ण बैठक हो रही है जिसमें मतदान के माध्यम से तय होगा कि क्या पार्टी का नेता चुनने के लिए जल्दी चुनाव कराने की आवश्यकता है या नहीं. प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की लिकुड पार्टी में हो रहे इस मतदान को शेरॉन की नेतृत्व क्षमता पर जनमतसंग्रह माना जा रहा है. ग़ज़ा पट्टी से सेना और यहूदी बस्तियों को हटाने के फ़ैसले पर शेरॉन की पार्टी के भीतर और बाहर कड़ी आलोचना हुई थी. पार्टी में नेतृत्व को लेकर शेरॉन को कड़ी चुनौती दे रहे हैं पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू. जिन्होंने ग़ज़ा से वापसी का विरोध किया था. रविवार को दोनों नेताओं ने तेल अवीव में पार्टी के एक सम्मेलन में भी हिस्सा लिया जिसमें नेतृत्व पर चर्चा हुई. इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री शेरॉन की स्थिति उस समय अजीब हो गई जब वे मंच पर बोलने के लिए तो खड़े हुए लेकिन माइक्रोफ़ोन ख़राब होने के कारण बोल नहीं पाए. कुछ रिपोर्ट में कहा गया कि उनके विरोधियों ने जान बूझकर बिजली की सप्लाई वाला तार काट दिया था. दबाव इस बीच ग़ज़ा में बढ़ती हिंसा की घटनाओं के कारण भी प्रधानमंत्री शेरॉन पर दबाव है. हालाँकि रविवार को उन्होंने कहा था कि इसराइली सेना फ़लस्तीनी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में हर तरीक़ा अपनाएगी.
ग़ज़ा पट्टी से वापसी को लेकर प्रधानमंत्री शेरॉन पहले से ही दबाव में हैं और उनकी अपनी पार्टी में ही उनका सबसे ज़्यादा विरोध हो रहा है. अब ग़ज़ा में हिंसा की घटनाओं के कारण उनके विरोधियों को और बल मिल गया है. उनका कहना है कि शेरॉन की ग़ज़ा योजना के कारण हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं. बीबीसी के मध्यपूर्व संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि पार्टी में शेरॉन के विरोधी चाहते हैं कि नेतृत्व के मामले पर जल्द चुनाव हो जाएँ. रविवार को पार्टी की एक रैली में शेरॉन को नेतृत्व के मामले में चुनौती दे रहे बिन्यामिन नेतन्याहू ने ग़ज़ा से वापसी का विरोध किया. |
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