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'परमाणु एजेंसी का प्रस्ताव स्वीकार नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. शनिवार को संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था. ईरान के विदेश मंत्री मनूचेहर मोत्तकी ने प्रस्ताव को ग़ैरक़ानूनी बताया और कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. आईएईए ने ईरान को अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम स्थगित करने और अपने परमाणु केंद्रों की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को अनुमति देने को कहा है. हालाँकि आईएईए ने यह मामला सुरक्षा परिषद में ले जाने के लिए कोई समयसीमा नहीं तय की है. आईएईए के प्रमुख मोहम्मद अल बरादेई ने कहा है कि इस मामले में कूटनीति को एक और मौक़ा दिया गया है. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि तीन महत्वपूर्ण यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने ईरान के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया है. संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के 35 सदस्यीय बोर्ड ने शनिवार को एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें परमाणु हथियार नियंत्रण संधि के उल्लंघन के लिए ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में ले जाया जा सकता है. बोर्ड के 22 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. 12 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया जबकि एक सदस्य देश ने प्रस्ताव का विरोध किया. ईरान के बारे में प्रस्ताव यूरोप के तीन देशों, ब्रिटेन,फ़्रांस और जर्मनी ने पेश किया था. प्रस्ताव का विरोध करनेवाला एकमात्र देश वेनेज़ुएला रहा. भारत को इस प्रस्ताव का विरोधी माना जा रहा था लेकिन भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला. रूस और चीन ने भी इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया था लेकिन दोनों ही देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. |
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