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ईरान परमाणु क्षमता से 'वर्षों दूर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन स्थित एक प्रभावशाली बुद्धिजीवी संगठन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ (आईआईएसएस) ने कहा है कि ईरान परमाणु हथियारों की क्षमता हासिल करने से अभी वर्षों दूर है. आईआईएसएस ने एक अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें ईरान की परमाणु, रसायनिक, जैविक और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों संबंधित गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ और अमरीका के साथ ईरान के राजनयिक मतभेद काफ़ी महत्वपूर्ण हो सकते हैं लेकिन हो सकता है कि ईरान का राजनीतिक संयम बहुत समय तक नहीं टिका रहे. रिपोर्ट के लेखकों में से एक डॉक्टर गैरी सैमोर ने बीबीसी को बताया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की तमाम तकनीकी दिक्कतों को दूर करने में पाँच साल का समय लग सकता है. लेकिन ईरान ने अभी तक जो रुख़ दिखाया है उससे पता चलता है कि परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने के बारे में फ़ैसला लेने में और देर हो सकती है. डॉक्टर गैरी सैमोर ने कहा, "वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं और मेरा ख़याल है कि वे परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने में ज़्यादा लंबा समय लेने की कोशिश करें, एक दशक या फिर 15 वर्ष." शस्त्र नियंत्रण आईआईएसएस का यह विश्लेषन ऐसे समय में आया है जब एक पखवाड़े बाद ही ईरान की परमाणु महत्वकांक्षाओं पर विचार करने के लिए विएना में एक बैठक होने वाली है. 'ईरान का सामरिक हथियार कार्यक्रम-एक विश्लेषण' नाम की यह रिपोर्ट ईरान के राजनीतिक इतिहास और परमाणु हथियार कार्यक्रम के मामले में हुई प्रगति का तब से ब्यौरा पेश करता है जब 1950 में ईरान ने शाह के नेतृत्व में जन्म लिया था.
बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं कि शस्त्र नियंत्रण विशेषज्ञों के लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान यूरेनिमय का उत्पादन करने और उसके संवर्धन की क्षमता हासिल करने के कितना नज़दीक है. ईरान का कहना है कि वह यूरेनियम संवर्धन की क्षमता ऊर्जा और ईंधन की ज़रूरतें पूरी करने के लिए हासिल करना चाहता है लेकिन यही तकनीक एक परमाणु बम के लिए भी आवश्यक सामग्री का काम कर सकती है. रिपोर्ट कहती है कि परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने से पहले ईरान के सामने दो तकनीकी बाधाएँ हैं. एक ये कि परमाणु हथियारों में काम आने वाली सामग्री का पर्याप्त उत्पादन और दूसरे ये कि ऐसे हथियार बनाना जो मिसाइलों पर लादकर इस्तेमाल की जा सके. लेकिन रिपोर्ट में ईरान की राजनीतिक महत्वकांक्षाओं के बारे में कोई विश्लेषण नहीं दिया गया है. रिपोर्ट में ईरान के संभावित रसायनिक और जैविक हथियार कार्यक्रम पर तो थोड़ा सा ही प्रकाश डाला गया है लेकिन इसमें ईरान के लंबी दूरी तक मार करने वाला मिसाइल बनाने के कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई है जिसके बारे में कहा गया है कि हाल के वर्षों में उल्लेखनीय तकनीकी प्रगति हुई है. ऐसा लगता है कि ईरान अपनी शहाब-3 मिसाइल प्रणाली पर ध्यान देने की इच्छा रखता है. यह प्रणाली उत्तर कोरिया की मिसाइल प्रणाली से मिलती जुलती है जो ईरान से इसराइल, तुर्की और दक्षिणी रूस के कुछ इलाक़ों तक मार कर सकती है. ईरान ने स्वीकार किया है कि वह अघोषित परमाणु कार्यक्रम चलाता रहा है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसलिए रिपोर्ट के लेखक इस बात को लेकर कम ही आशान्वित हैं कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर लगी अस्थाई पाबंदी को स्वीकार करना जारी रखेगा. |
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