|
यूरोपीय संघ और अमरीका को चेतावनी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमरीका और यूरोपीय संघ उसके परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षा परिषद के सामने ले गए तो ये एक बड़ी भूल होगी. ईरान ने ये चेतावनी इस्फ़हान में अपने परमाणु केंद्र पर पूरी तरह काम शुरू करने के बाद दी है. यूरोपीय संघ के तीन देशों, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के सामने एक प्रस्ताव का मसौदा रखा है जिसमें ईरान से इस परमाणु कार्यक्रम को रोकने की माँग की गई है. आयोग के सामने इस प्रस्ताव पर गुरूवार को चर्चा होगी. लेकिन वियना में बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार ने कहा है कि ईरान को नाभिकीय ईंधन के उत्पादन का पूरा अधिकार है. वार्ताकार साइरस नासेरी ने बीबीसी के एक कार्यक्रम में कहा,"अमरीका और विशेष रूप से यूरोप के लिए टकराव का रास्ता पकड़ना एक बड़ी भूल होगी. उनके लिए सुरक्षा परिषद के पास जाने का कोई वैधानिक आधार नहीं है". कि यूरोपीय संघ के साथ बातचीत नाकाम हो चुकी है. उन्होंने कहा,"हमें ना तो अभी और ना ही भविष्य में इस बातचीत से कोई उम्मीद है". अन्नान का आग्रह संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लेकर जारी गतिरोध को दूर करना बेहद ज़रूरी है. उन्होंने यूरोपीय संघ के देशों से ईरान से बातचीत करते रहने के लिए कहा. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि उन्होंने ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से बात की है और उनसे संयम बरतने के लिए कहा है. उल्लेखनीय है कि ईरान ये कहते हुए अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखना चाहता है कि वह परमाणु ऊर्जा का प्रयोग वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत के रूप में करेगा. लेकिन पश्चिमी देश ईरान के इरादे पर संदेह करते हैं और कहते हैं कि ईरान दरअसल परमाणु हथियार बनाना चाहता है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||