| ईरान आईएईए को सहयोग जारी रखेगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के परमाणु मामलों के प्रमुख वार्ताकार अली लारिजानी ने कहा है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी को सहयोग देना जारी रखेगा. अली लारिजानी भारत यात्रा पर हैं और उन्होंने दिल्ली में विदेश मंत्री नटवर सिंह और सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से मुलाक़ात की है. भारत यात्रा से पहले वे वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई से मिलकर लौटे हैं. परमाणु मसले पर ईरान की ईयू-3 देशों (ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी) से जो गतिरोध बन गया है उसके चलते अली लारिजानी की भारत यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उल्लेखनीय है कि अमरीका और यूरोपीय संघ ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम तब तक शुरु न करे जब तक आईएईए इसकी अनुमति नहीं देता. जबकि ईरान का कहना है, "हमने अपना परमाणु संयंत्र ख़ुद बंद किया था और हम उसे कभी भी शुरु कर सकते हैं क्योंकि हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है." आईएईए ईरान के परमाणु ठिकानों की जाँच करके यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि उसके पास परमाणु हथियार बनाने की सुविधाएँ तो उपलब्ध नहीं हैं. समर्थन की कोशिश अली लारिजानी अपनी भारत यात्रा के दौरान अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "भारत और ईरान के दोस्ताना संबंध रहे हैं. सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक मसलों पर और ख़ासकर दोनों देशों के सुरक्षा के मसलों पर दोनों देश एक दूसरे को सहयोग देते रहे हैं." दरअसल ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बहस को एक दूसरे मंच पर उठाना चाहता है. ईरान का कहना है कि उनके परमाणु कार्यक्रम पर ईयू-3 देश क्यों फ़ैसला कर रहा है, आईएईए क्यों नहीं जिसके बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में नाटो देशों सहित 35 देश सदस्य हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ईरान सभी गुटनिरपक्ष देशों और रुस तथा चीन जैसे देशों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है. |
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