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सद्दाम के वकीलों ने नाराज़गी ज़ाहिर की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सद्दाम हुसैन के वकीलों ने कहा है कि वे इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ चलने वाले मुक़दमे की तारीख़ को नहीं मानेंगे क्योंकि अदालत ने इसकी कोई सूचना उन्हें नहीं दी है. सद्दाम हुसैन के वकील ख़लील दुलैमी ने यह भी कहा है कि बचाव पक्ष को फ़ाइलें पढ़ने का भी मौक़ा नहीं दिया गया है जबकि उन्होंने इसके लिए अपील की थी. इराक़ी सरकार ने इस महीने के शुरू में घोषणा की थी कि सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमे की सुनवाई 19 अक्तूबर से शुरू होगी. यह सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ चलने वाला पहला मुक़दमा है जिसमें उनके ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल कर दिया गया है, उन पर 1982 में दुजाली नाम के गाँव में 143 शिया मुसलमानों की हत्या के आदेश देने का इल्ज़ाम है. सद्दाम हुसैन की हत्या की नाकाम कोशिश के बाद इराक़ी सैनिकों ने इस गाँव पर भारी हमला बोल दिया था जिसमें 143 लोग मारे गए थे. लंदन स्थित सद्दाम हुसैन के वकील अब्दुल हक़ अलानी ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "उन्हें मुक़दमे की सुनवाई की शुरूआत की सूचना नोटिस के ज़रिए देनी होगी, उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है." अगर इस मामले में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें मृत्युदंड भी दिया जा सकता है. कई मामले इस मामले में सद्दाम हुसैन के अलावा, पूर्व उप राष्ट्रपति ताहा यासीन रमज़ान और एक पूर्व जज के ख़िलाफ़ भी इस मामले में मुक़दमा चलेगा. दुजाली जनसंहार मुक़दमे की सुनवाई सबसे पहले शुरू हो रही है क्योंकि उसकी जाँच पूरी कर ली गई है, बाक़ी मामलों में सबूत जुटाने का काम जारी है. इराक़ी सरकार का कहना है कि वैसे तो सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ 500 से अधिक मुक़दमे बन सकते हैं लेकिन इसकी जगह उनके ख़िलाफ़ मोटे तौर पर 12 अभियोग लगाए जाएँगे. यानी एक-एक मुक़दमे की सुनवाई के बदले गंभीर आरोपों के आधार पर सुनवाई होगी. 1991 में शिया मुसलमानों का दमन, कुर्द गाँव हलाब्जा में 1988 में जनसंहार और 1990 में कुवैत पर हमला आदि अन्य मुख्य अभियोग हैं जो उनके ख़िलाफ़ लगाए जाएँगे. |
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