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संयुक्त राष्ट्र में सुधार के मसौदे पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र में सुधार के मसौदे पर सहमति हो गई है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र राजदूतों की बैठक में यह समझौता हुआ. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में इस पर औपचारिक रूप से मुहर लगेगी. सुधार के मसौदे पर लंबे समय से विचार-विमर्श चल रहा था और आख़िरकार संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन शुरू होने से एक दिन पहले इस पर सहमति हो गई है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कई मुद्दों को मसौदे में दरकिनार किए जाने पर अफ़सोस जताया है. अन्नान ने कहा कि मसौदे में निशस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार जैसे मुद्दों को शामिल न करना अपमानजनक है. उन्होंने कहा कि अब दुनियाभर के नेताओं को इन मुद्दों पर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करनी चाहिए. दुनियाभर के नेता संयुक्त राष्ट्र के इस विशेष सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में मौजूद हैं. मौक़ा है संयुक्त राष्ट्र के गठन की 60वीं सालगिरह का. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष जाँ पिंग ने इस मसौदे को तैयार किया है. इस मसौदे में संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को भी प्रमुखता दी गई है. जिसे ग़रीबी हटाने के लिए तैयार किया गया है. विवाद संयुक्त राष्ट्र स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मसौदे में एक नए मानवाधिकार संगठन के गठन का भी वादा किया गया है लेकिन इसके बारे में ज़्यादा विवरण नहीं दिए गए हैं. हालाँकि मसौदे में कई विवादित मुद्दों को छोड़ दिया गया है. इनमें निशस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार भी एक मुद्दा था. मसौदे में जिन मुद्दों पर विवाद था, उनमें शामिल थे- नए मानवाधिकार संगठन का गठन, आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र के प्रबंधन में सुधार. राजनयिकों का कहना है कि सुधार के मसौदे पर सहमति हो गई है हालाँकि कुछ मतभेद क़ायम हैं. मसौदे पर सहमति की घोषणा से पहले संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा कि विचार-विमर्श पहला अच्छा क़दम है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. |
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