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भारत समेत अनेक देश आगे आए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में कैटरीना तूफ़ान की विपदा के बाद दुनिया के अनेक देशों ने अमरीका को मदद देने की पेशकश की है. इनमें भारत भी शामिल है. इनके अलावा कई ऐसे देशों ने अमरीका को मदद देने की घोषणा की है जो आमतौर पर अभी तक अमरीका से सहायता प्राप्त करते रहे हैं. क्यूबा और वेनेज़ुएला जैसे देशों ने भी अमरीका को मदद की पेशकश की है जिनकी अमरीका से अनबन रही है. अमरीका सरकार ने कहा है कि वह अभी इन सभी प्रस्तावों पर विचार कर रही है. अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस सहायता की पेशकश करनेवाले सभी देशों का आभार प्रकट किया है. उन्होंने कहा कि वे श्रीलंका के मदद देने के प्रस्ताव से ख़ासतौर पर अभिभूत हुई हैं पिछले वर्ष सूनामी लहरों के कारण भारी तबाही हुई थी. सहायता समाचार एजेंसी पीटीआई ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू के हवाले से ख़बर दी है कि भारत सरकार ने अमरीकी रेड क्रॉस को 50 लाख डॉलर की सहायता दी है. भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका ने अमरीकी रेड क्रॉस को 25,000 डॉलर देने की घोषणा की है. चीन ने 50 लाख डॉलर, जापान ने दो लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया ने 80 लाख डॉलर की सहायता देने का वादा किया है. तेल का निर्यात करनेवाले एक महत्वपूर्ण देश और अमरीका के आलोचक वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ने कहा है कि उन्होंने अमरीका को सस्ता तेल देने और राहतकर्मियों को भेजने का प्रस्ताव किया है. अमरीका के ऐसे ही एक विरोधी देश क्यूबा के राष्ट्रपति फ़िडेल कास्त्रो ने 11,000 चिकित्सकों और 26 टन दवाएँ भेजने की पेशकश की है. वहीं अमरीका को होंडुरास, गुआटेमाला और जमैका जैसे विकासशील देशों ने भी अमरीका को दान देने का प्रस्ताव रखा है. |
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