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इराक़ में शोक, मृतकों की अंत्येष्टि | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में बुधवार को मची भगदड़ के दौरान मारे गए लोगों को आज दफ़नाया जा रहा है. शिया मुसलमानों के एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान पहले तो मोर्टार से हमले हुए और उसके बाद मची भगदड़ में 960 से ज़्यादा लोग मारे गए. प्रधानमंत्री इब्राहिम अल जाफ़री ने देश में तीन दिनों के शोक की घोषणा की है. माना जा रहा है कि आत्मघाती हमलावर के मौजूद होने की अफ़वाह से भगदड़ मची, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोग मारे गए. इराक़ के शिया नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के समर्थकों को अफ़वाह उड़ाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. दूसरी ओर प्रधानमंत्री इब्राहिम जाफ़री ने एकजुटता की अपील की है. लेकिन बग़दाद स्थित एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस मामले को लेकर उनकी सरकार में भी विभाजन है. इराक़ के स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल मुतालिब मोहम्मद अली ने गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के त्यागपत्र की मांग की है क्योंकि ये दोनों मंत्री लोगों की सुरक्षा करने में नाकाम रहे. लेकिन प्रधानमंत्री जाफ़री ने इन मांगों को ठुकरा दिया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि मंत्रियों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हरसंभव कोशिश की. उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री की आलोचना भी की. अपील शिया समुदाय के नेताओं ने शांति की अपील की है लेकिन आशंका है कि बुधवार की घटना के बाद हिंसा की घटनाएँ बढ़ सकतीं हैं.
बुधवार की घटना के प्रति दुनियाभर के नेताओं ने संवेदना व्यक्त की है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने इसे सदमा कहा है और इसके लिए आतंकवादियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि ईरान, सीरिया और इराक़ को मिलकर आतंकवादियों का मुक़ाबला करना चाहिए. बुधवार को राजधानी बग़दाद की कादिमिया मस्जिद में क़रीब 10 लाख शिया मुसलमान इकट्ठा हुए थे. पहले भीड़ पर मोर्टार से हमला किया गया जिसमें सात लोगों की मौत हो गई. इसके बाद ही लोगों में और हमले के प्रति चिंता बढ़ गई थी. माना जा रहा है कि इसके बाद ये अफ़वाह उड़ी कि आत्मघाती हमलावर भी वहाँ मौजूद है. इसके बाद भगदड़ मची और क़रीब एक हज़ार लोगों ने अपनी जान गँवा दी. भगदड़ के कारण दजला नदी पर बने पुल की रेलिंग टूट गई और कई लोग नदी में डूब गए. मृतकों में ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे हैं. वर्ष 2003 में इराक़ में शुरू हुई अमरीकी सैनिक कार्रवाई के बाद यह पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में लोग एक दिन में मारे गए हैं. |
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