| इराक़ी मसौदे से अशांति की आशंका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने कहा है कि इराक़ी संविधान के मसौदे में कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिनसे 'अशांति को बढ़ावा' मिल सकता है. अम्र मूसा ने बीबीसी से कहा कि अरब लीग इराक़ में संघीय व्यवस्था के मुद्दे पर सुन्नियों की चिंताओं से सहमत है और इस तथ्य पर भी चिंतित है कि इराक़ को एक अरब देश परिभाषित नहीं किया गया है. सुन्नियों ने नए संविधान के मसौदे का बहिष्कार किया है और इस बहिष्कार को अमरीका और ब्रिटेन ने ज़्यादा महत्व नहीं दिया है. इस मसौदे पर 15 अक्तूबर को जनमतसंग्रह कराया जाएगा. अम्र मूसा ने कहा कि बीबीसी से कहा, "संविधान पर सहमति नहीं बनने पर मैं बहुत से इराक़ियों की चिंताओं से सहमत हूँ." उन्होंने कहा कि वह इस बात पर भी चिंतित हैं कि इराक़ को इस मसौदे में एक 'अरब देश' परिभाषित नहीं किया गया है. मूसा ने कहा, "मैं शिया - सुन्नी, मुस्लिम - ईसाई और अरब - कुर्दों के बीच इस बँटवारे में भरोसा नहीं रखता. मैं इससे सहमत नहीं हूँ और मुझे इसमें ऐसी वजह साफ़-साफ़ नज़र आ रही है जिससे इराक़ और उसके आसपास अशांति फैल सकती है." अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मसौदे का स्वागत करते हुए कहा है कि अब इराक़ियों को जनमतसंग्रह के ज़रिए 'एक स्थायी इराक़ी सरकार की स्थापना' का मौक़ा मिलेगा. बुश ने कहा, "ज़ाहिर है कि असहमतियाँ हैं. हम एक राजनीतिक प्रक्रिया को वास्तविकता में बदलते हुए देख रहे हैं, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें वाद-विवाद और समझौतों को बढ़ावा मिलता है." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा भी हो सकता है कि यह मसौदा कभी लागू ही ना हो पाए. इस मसौदे को संविधान का रूप मिलने के लिए ज़रूरी है कि इसे पूरे देश में मतदान के ज़रिए बहुमत हासिल हो. साथ ही यह भी ज़रूरी है कि इसे इराक़ के 18 प्रांतों में से कम से कम तीन या ज़्यादा प्रांतों में दो तिहाई मतदाताओं इसे नामंज़ूर भी नहीं किया हो. संवाददाताओं का कहना है कि सुन्नी चार प्रांतों में बहुमत में हैं और इस तरह वे जनमतसंग्रह में इस मसौदे को वीटो कर सकते हैं. विरोध और चिंताएँ पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के गृहनगर तिकरित में लगभग दो हज़ार सुन्नी नेताओं ने इस मसौदे का विरोध करने के लिए प्रदर्शन भी किया.
बहुत से लोगों ने सद्दाम हुसैन की तस्वीरें भी हाथों में ले रखी थीं और एक बयान पढ़कर सुनाया गया जिसमें संविधान के मसौदे को यह कहते हुए "एक यहूदी दस्तावेज़" क़रार दिया गया कि इससे देश जातीय आधार बँट जाएगा. उधर राजधानी बग़दाद में बहुत से शिया लोग संविधान के मसौदे के प्रति समर्थन व्यक्त करने के लिए इकट्ठा हुए. मसौदे में शिया समुदाय को कुछ स्वायत्तता देने की बात कही गई है. शिया समुदाय इराक़ के दक्षिणी हिस्से में ज़्यादा है और यह हिस्सा तेल समृद्ध है. अब इस मसौदे की प्रतियाँ पूरे इराक़ में लोगों को बाँटने की तैयारियाँ की जा रही हैं. शिया और कुर्द नेताओं ने इस मसौदे को अपनी मंज़ूरी दे दी है लेकिन सुन्नी वार्ताकारों ने इस पर अपने नाम लिखने से इनकार कर दिया. सुन्नी नेताओं को आशंका है कि इस मसौदे से उत्तरी हिस्से में कुर्दों और दक्षिणी हिस्से में शियाओं का दबदबा हो जाएगा और सुन्नी समुदाय तेल संसाधनों से वंचित हो जाएगा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||