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बुधवार, 31 अगस्त, 2005 को 23:15 GMT तक के समाचार
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बग़दाद में भगदड़, 960 की मौत
काज़िमिया मस्जिद
लगभग 10 लाख शिया श्रद्धालु इमाम मूसा अल काज़िम की बरसी पर जुटे थे जब हादसा हुआ
इराक़ की राजधानी बग़दाद में शिया समुदाय के एक धार्मिक समारोह के दौरान भगदड़ मचने से सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

मरनेवालों की संख्या के बारे में अलग-अलग तरह की ख़बरें मिल रही हैं.

इराक़ी स्वास्थ्य मंत्रालय ने लगभग 960 लोगों के मारे जाने की बात कही है लेकिन अन्य श्रोतों के अनुसार ये संख्या और अधिक हो सकती है.

इराक़ी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार और 460 लोग घायल हैं.

 लोग पुल पर जुटे, पुल के आख़िरी सिरे पर लोगों की तलाशी होनी थी, तभी एक चीख सुनाई दी जिसके बाद कोलाहल हुआ और ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी
इराक़ी रक्षा मंत्री

इराक़ पर वर्ष 2003 में अमरीका की अगुआई में किए गए हमले के बाद से किसी एक ही घटना में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं.

इराक़ में कट्टर सुन्नी गुट पहले भी शिया गुटों को निशाना बनाते रहे हैं लेकिन इराक़ी अधिकारियों का कहना है कि बुधवार के हादसे का संबंध शिया-सुन्नी संघर्ष से नहीं है.

इराक़ सरकार ने देश में तीन दिन के शोक की घोषणा की है.

अफ़वाह से फैली भगदड़

बुधवार को ये हादसा तब हुआ जब शिया समुदाय के लगभग 10 लाख लोग बग़दाद के उत्तर में काज़िमिया मस्जिद में एक धार्मिक समारोह के लिए जुटे थे.

ये समारोह आठवीं सदी के इमाम मूसा अल-काज़िम की शहादत की याद में हो रहा था.

मुस्लिम त्योहारों में हादसे
जुलाई 1987- मक्का में सऊदी सुरक्षाबलों और ईरानी तीर्थयात्रियों के बीच संघर्ष, 402 की मौत
जुलाई 1990- मक्का में भगदड़, 1426 की मौत
मई 1994- मक्का में भगदड़, 270 की मौत
अप्रैल 1997- सऊदी अरब में मीना में शिविरों में आग लगी, 340 की मौत
फ़रवरी 2004- मीना में भगदड़, 251 की मौत

तभी ऐसी अफ़वाह फ़ैल गई कि भीड़ में एक आत्मघाती हमलावर है, जिसके बाद भगदड़ मच गई.

कई लोग कुचलकर मारे गए जबकि बहुत सारे लोग दजला नदी के ऊपर बने एक पुल की रेलिंग टूटने के कारण नदी में गिरकर डूब गए.

शियाओं की धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं को इस धार्मिक समारोह के अवसर पर इस पुल को नंगे पाँव चलकर पार करना होता है.

जिस जगह ये हादसा हुआ वहाँ पहले से ही तनाव था क्योंकि वहाँ बुधवार को ही एक मोर्टार हमला हुआ था जिसमें कम-से-कम सात लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे.

मोर्टार हमला

भगदड़ से पहले बुधवार को काज़िमिया मस्जिद के पास जब श्रद्धालु जुट रहे थे तभी उनके ऊपर मोर्टार से हमला किया गया.

News image
प्रथा के अनुसार श्रद्धालुओं को नंगे पाँव दजला नदी पर बने पुल को पार करना था

एक सुन्नी गुट जायश-अल-तैफ़ा-अल-मंसूरा ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

इस संगठन की ओर से एक ऐसी वेबसाइट पर एक बयान प्रकाशित किया गया है जिसपर अल-क़ायदा और इससे जुड़े अन्य चरमपंथी गुटों के बयान प्रकाशित होते रहे हैं.

लेकिन इराक़ के रक्षा मंत्री सादुन-अल-दुलैमी ने ज़ोर देकर कहा है कि भगदड़ में हुई मौतों को मोर्टार हमले की घटना से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

इराक़ी मंत्री ने कहा,"लोग पुल पर जुटे, पुल के आख़िरी सिरे पर लोगों की तलाशी होनी थी, तभी एक चीख सुनाई दी जिसके बाद कोलाहल हुआ और ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी".

चिंता

वैसे बग़दाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस घटना के बाद इराक़ में शिया-सुन्नी समुदायों के बीच मतभेद और बढ़ने की चिंता पैदा हो गई है.

बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के विश्लेषक का कहना है कि शिया समुदायों पर चूँकि पहले भी सुन्नियों के हमले होते रहे हैं इसलिए इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं किया जा सकता कि शिया श्रदधालुओं में पहले से ही भय था.

जिस पुल पर भगदड़ मची वह पुल शिया और सुन्नी इलाक़ों को जोड़ता है.

पुल के पूर्वी सिरे पर अधमिया नामक सुन्नी इलाक़ा है और दूसरे सिरे पर काज़िमिया नामक शिया इलाक़ा.

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