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गुरुवार, 01 सितंबर, 2005 को 08:31 GMT तक के समाचार
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बेसलान बंधक कांड की पहली बरसी
बेसलान
बड़ी संख्या में लोग स्कूल के बाहर इकट्ठा हुए
रूस के बेसलान शहर में पिछले साल हुए दर्दनाक बंधक कांड की पहली बरसी मनाई जा रही है.

चरमपंथियों ने पिछले साल दक्षिणी रूस के शहर बेसलान में एक स्कूल में बच्चों को बंधक बना लिया था.

इस बंधक कांड का अंत हिंसा से हुआ था जिसमें 331 लोग मारे गए थे. मरनेवालों में से 186 बच्चे थे.

चरमपंथियों ने तीन दिनों तक क़रीब 1300 लोगों को बंधक बनाए रखा था.

बेसलान कांड की पहली बरसी पर तीन दिन तक समारोह आयोजित हो रहे हैं.

गुरूवार को स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह ठीक सवा नौ बजे शहर में घंटियाँ बजाई गईं. ठीक इसी समय पिछले साल बेसलान के स्कूल में चेचन चरमपंथी घुसे थे.

जिस स्कूल में बच्चों को बंधक बनाया गया था उस स्कूल के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए.

उन्होंने फूल चढ़ाकर और मोमबत्तियाँ जलाकर उस दिन मारे गए लोगों को याद किया.

इनमें मारे गए लोगों के परिजनों के साथ-साथ वे सौभाग्यशाली लोग भी थे, जो इस हादसे में बच गए थे.

नाराज़गी

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तीन दिन बाद ख़त्म हुए बंधक संकट में 331 लोग मारे गए थे जिनमें 186 बच्चे थे

जिस जिम्नेज़ियम या व्यायामशाला में इतने लोगों को बंधक बनाया गया था, वहाँ अब मारे गए लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं. एक साल बाद भी लोगों का ग़म कम नहीं हुआ था.

लेकिन इसके साथ-साथ लोगों में नाराज़गी भी है. बेसलान से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोग रूसी अधिकारियों से नाराज़ हैं.

लोग ये जानना चाहते हैं कि कैसे इतनी बड़ी संख्या में चरमपंथी स्कूल में घुस गए और अधिकारियों ने उनसे बातचीत करने से क्यों इनकार कर दिया.

इस हादसे का अंत बड़ी हिंसा से हुआ था. लोग ये भी जानना चाहते हैं कि इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन शुक्रवार को उन महिलाओं से मिलेंगे जिनके बच्चे बंधक संकट के दौरान मारे गए थे.

समझा जा रहा है कि व्लादीमिर पुतिन को तब कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है.

पुतिन ने गुरूवार को क्रैस्नोडार शहर में एक मिनट मौन रहकर बेसलान कांड में मारे गए लोगों को याद किया.

बेसलान में पिछले वर्ष एक सितंबर को स्कूल के नए सत्र के पहले ही दिन ये हादसा हुआ था जब चेचन विद्रोहियों ने लगभग 1300 लोगों को बंधक बना लिया.

तीन दिन बाद यानी तीन सितंबर को रूसी सैनिकों ने धमाके की आवाज़ सुनने के बाद इमारत पर धावा बोल दिया.

सैनिक कार्रवाई में 331 लोग मारे गए. अधिकतर बंधककर्ता भी मारे गए थे.

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