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कौन थे अपहरणकर्ता? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी सरकार का कहना है कि बेसलान शहर के बंधक संकट के लिए ज़िम्मेदार अपहरणकर्ता एक अंतरराष्ट्रीय गुट के लोग थे. रूसी सरकार के अनुसार इनका संबंध विद्रोही चेचेन कमांडर शमील बसायेफ़ और डॉकू उमारोफ़ से संबंध है. सरकार मानती है कि इन चेचेन नेताओं के गुट को अल क़ायदा से आर्थिक सहायता मिलती है. जांचकर्ताओं ने बंधक बनाए गए कुछ लोगों को जो तस्वीरें दिखाईं उसमें से बंधकों ने डॉकू उमारोफ़ की पहचान की है. लेकिन उमारोफ़ और बसायेफ़ के इस कांड में शामिल होने के इससे ज़्यादा सबूत नहीं मिल पाए हैं. रूसी अधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि अपहरणकर्ताओं में से नौ या दस लोग अरब मूल के हैं. संभव है कि सरकार ने इस मामले में अल कायदा के जुड़े होने के अपने दावे को आधार देने के लिए भी यह बात कही हो. लेकिन अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भाग निकले बंधकों का कहना है कि उन्होंने स्कूल में किसी अरब को नहीं देखा था. विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि फ़िलहाल इस कांड में अल कायदा और चेचेन विद्रोहियों के संबंध साबित नहीं हो रहे. लेकिन इस बात की भी चर्चा है कि चेचन विद्रोहियों को उनसे सहानुभूति रखने वाले विदेशी मुसलामानों से धन मिलता रहा है और चेचेन विद्रोहियों के बीच अरब कमांडर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. प्रमुख चेचन विद्रीही नेता असलन मस्खाडॉफ़ ने स्कूल में बच्चों को बंधक बनाए जाने की ज़ोरदार भर्त्सना की है. एक बात यहां यह भी बता दें कि यूरोप में मस्खाडॉफ़ के एक दूत ने कहा था कि बंधक प्रकरण समाप्त करने के लिए मध्यस्थतता कर रहे पूर्व इंगुश नेता रुसलन यूशेफ़ ने उन्हें बताया कि अपहरणकर्ता चेचन नहीं थे. |
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