|
यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ चीन में क़ानून | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन में पहली बार महिलाओं के यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया है. चीन की नेशनल पीपुल्स काँग्रेस की एक समिति ने इसके लिए क़ानून में संशोधन को पास कर दिया है. क़ानून बनाने वाली चीन की इस समिति ने कहा कि अब सबको बराबरी का हक़ देना देश की राष्ट्रीय नीति होगी. अब चीन की महिलाएँ अपने पति के साथ-साथ उन लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई कर सकतीं हैं, जो उन्हें प्रताड़ित करते हैं. बीजिंग से बीबीसी संवाददाता रूपर्ट विंगफ़ील्ड का कहना है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न चीन में एक बड़ी समस्या है. सर्वेक्षण साइना डॉट कॉम और एक चैट पत्रिका ने एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराया था, जिसके मुताबिक़ देश की 79 फ़ीसदी महिलाओं को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. चाइनीज़ एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंस के एक अध्ययन के अनुसार विदेशी कंपनियों या निजी क्षेत्र में काम करने वाली 40 फ़ीसदी महिलाएँ यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं. जबकि सरकारी कंपनियों में 18 प्रतिशत महिलाओं का शोषण होता है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन में नया क़ानून तो आ गया है लेकिन महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए इससे भी ज़्यादा करने की आवश्यकता है. नए क़ानून के तहत सभी कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को कहा गया है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में क़दम उठाएँ. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार नए संशोधन के तहत लिंग के आधार पर समानता अब देश की राष्ट्रीय नीति का बुनियादी हिस्सा होगा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||