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चीन में एड्स कार्यकर्ता परेशान: रिपोर्ट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने चीन पर एड्स की रोकथाम के लिए काम करने वाले लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि चीन की सरकार एड्स की रोकथाम और इससे बचाव के संबंध में जानकारी देने वाले कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है. संगठन की रिपोर्ट के अनुसार चीनी सरकार ने एड्स के प्रसार को रोकने की प्रतिबद्धता जाहिर की है लेकिन वो रोकथाम संबंधी किसी भी ऐसी गतिविधि को शक से निगाह से देख रही है जिस पर उनका नियंत्रण न हो. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कई इलाक़ों में एड्स के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है. कार्यकर्ताओं को पीटा जा रहा है. इतना ही नहीं पोर्नोग्राफ़ी संबंधी क़ानूनों का इस्तेमाल कर के उन वेबसाइटों को भी बंद किया जा रहा है जो एड्स संबंधी जानकारियां दे रहे हैं.
संगठन का कहना है कि चीन के कई इलाक़ों में स्थानीय अधिकारियों को एड्स के बारे में कोई जानकारी नहीं है और वो इस बात से डर रहे हैं कि एड्स के बारे में लोगों में चर्चा से इन इलाक़ों में निवेश नहीं हो सकेगा. संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के मुताबिक अगर चीन में एड्स की रोकथाम के लिए तत्काल उपाय नहीं किए गए तो वहां इस दशक के अंत तक एड्स रोगियों की संख्या एक करोड़ तक पहुंच जाएगी. इस सला के अंत तक चीन में एक नए क़ानून के लागू होने की उम्मीद है जिससे एड्स से पीड़ित लोगों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी. |
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