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अब अगला क़दम फ़लस्तीनी उठाएँ: बुश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा से इसराइल के हटने के बाद अमरीका के राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि अब अगला क़दम फ़लस्तीनी लोगों को उठाना चाहिए. राष्ट्रपति बुश ने पत्रकारों से कहा कि इन क़दमों से फ़लस्तीन और इसराइल के बीच शांतिवार्ता फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनियों को अपने सुरक्षा बलों और प्रशासन में सुधार लाना होगा. इससे पहले इसराइली सेना ने मंगलवार को पश्चिमी तट से यहूदी बाशिंदों को हटाने का काम पूरा कर लिया. पश्चिमी तट की शानूर और हमेश बस्तियों को भी ख़ाली करने के साथ ही योजना के पहले चरण का काम पूरा हो गया है, अब इन बस्तियों की इमारतों को तोड़ने का काम चलेगा. सोमवार को ग़ज़ा पट्टी के लगभग साढ़े आठ हज़ार यहूदियों को वहाँ से हटा दिया गया था. इस तरह प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की 'गज़ा से वापसी की योजना' पर अमल कर दिया गया है. लेकिन पश्चिमी तट की लगभग 120 बस्तियों में लगभग साढ़े चार लाख यहूदी बाशिंदे बने रहेंगे. मंगलवार को सेना बुलडोज़र लेकर पश्चिमी तट में दाख़िल हुई लेकिन उसे विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. पश्चिमी तट की इन दो बस्तियों में लगभग 2000 कट्टरपंथी यहूदी एकत्र हो गए जिनके पास कुछ देसी हथियार भी थे. हमेश और शानूर बस्तियों में रहने वाले कई लोग तो चुपचाप ही वहाँ से चले गए लेकिन कुछ बाहर से आए यहूदियों ने बस्तियाँ खाली करवाने का विरोध ज़रूर किया. शानूर में प्रदर्शनकारियों ने एक पुराने किले में शरण ले ली लेकिन पुलिस ने लोहे के गेट को काटकर, वहाँ यहूदी उपासनागृह में दाख़िल होकर, प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाला और उन्हें घसीटकर बसों में बिठा दिया. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वहाँ हिंसा होने की सरकार की चेतावनी के बावजूद स्थिति शांतिपूर्ण है. इससे पहले गज़ा की बस्तियों को खाली करवाने के लिए भी सैनिक भेजे गए थे लेकिन वे सशस्त्र नहीं थे. गज़ा से बस्तियाँ पूरी तरह ख़ाली करवाए जाने के बाद फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से दो महीने के बाद फ़ोन पर सीधी बात की थी. इस बीच गज़ा में बस्तियाँ गिराने का काम जारी है. ये काम कई हफ़्तों तक चलेगा और फ़लस्तीनी प्रशासन की सहमति से किया जा रहा है. इसराइल के सेना प्रमुख ने उम्मीद जताई है कि ख़ाली करवाई गई सभी बस्तियों में घरों को दस दिन के अंदर गिरा दिया जाएगा और सितंबर के अंत तक सेना ग़ज़ा से हट जाएगी. |
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