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बस्तियाँ हटने से शांति प्रक्रिया को बल मिलेगा- अमरीका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व मामलों पर अमरीकी दूत ने कहा है कि ग़ज़ा पट्टी से इसराइली वापसी से वहाँ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नए अवसर सामने आए हैं. रोडमैप के नाम से जानी जाने वाली इस शांति प्रक्रिया के बारे में अमरीकी अधिकारी ने अपने विचार फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास से बातचीत के बाद व्यक्त किए हैं. डेविड वेल्च के मुताबिक़, उनका देश मानता है कि "दो लोकतांत्रिक राष्ट्र (इसराइल और फ़लस्तीन) शांति और सुरक्षा के साथ एक दूसरे के साथ रह सकते हैं." उन्होंने कहा कि उनका देश फ़लस्तीनी प्रशासन को समर्थन देगा ताकि वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करके क़ानून-व्यवस्था को बनाए रखे. कैबिनेट इस बीच इसराइली कैबिनेट ने सात और यहूदी बस्तियों को भी हटाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी. ग़ज़ा से वापसी की प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की योजना के तहत सभी यहूदी बस्तियों को वहाँ से हटाया जा रहा है, जिनकी कुल संख्या 20 से अधिक है. मंत्रिमंडल ने रविवार को कुल सात बस्तियों को हटाने को मंज़ूरी दी है जिसमें तीन ग़ज़ा पट्टी में और चार पश्चिमी तट पर स्थित हैं. अभियान जारी ग़ज़ा पट्टी में रविवार के दिन भी बस्तियों को जबरन ख़ाली कराने का काम जारी रहा. इसराइली सेना के जवान बुलडोज़रों के साथ कतीफ़ नाम की एक बस्ती में दाख़िल हुए जहाँ पचास से अधिक परिवार अड़े हुए थे और नारे लगा रहे थे. सैकड़ों इसराइली सैनिकों ने उत्तरी ग़ज़ा पट्टी में इल सैनाई में भी लोगों को हटाने की कोशिश की है, इन लोगों का कहना है कि इस बस्ती में वे एक साथ रहते आए हैं और अब वे कहीं और नहीं जाना चाहते. उनकी माँग है कि इल सैनाई से सभी लोगों को एक साथ हटाया जाए और उन्हें नई जगह पर एक साथ बसाया जाए ताकि वे एक-दूसरे से बिछड़ें नहीं. अब तक इसराइल ग़ज़ा योजना के तहत 20 से अधिक छोटी-बड़ी बस्तियों को ख़ाली करा चुका है और सेना जल्द ही इस योजना का दूसरा चरण शुरू करने जा रही है, जिसके तहत सभी घरों और प्रार्थनास्थलों को गिरा दिया जाएगा. इसके बाद ख़ाली ज़मीन फ़लस्तीनियों को सौंप दी जाएगी. |
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