| बस्तियाँ ख़ाली कराने के लिए कार्रवाई जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सैनिकों ने गज़ा पट्टी में यहूदियों के दो उपासनागृहों में छापे मारकर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को वहाँ से बाहर निकाला है. उपासनागृहों की छतों पर चढ़े हुए प्रदर्शनकारी सैनिकों का विरोध करने के लिए कंटीली तारों के पीछे खड़े हुए थे लेकिन सैनिकों ने बलपूर्वक उन्हें वहाँ से बाहर निकाला. गुरुवार शाम को कफ़ार दारोम दरोम के उपासनागृह में शरण लेने वाले प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ भी सैनिकों ने कार्रवाई करनी शुरु कर दी. इसाराइली सरकार के गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने की नीति के अंतर्गत वहाँ ये कार्रवाई की जा रही है और हज़ारों सैनिकों ने गज़ा पट्टी से कई यहूदियों को बलपूर्वक हटाया है. मंगलवार की समयसीमा गज़ा में बसे इन लोगों ने सरकारी चेतावनी के बावजूद वहाँ से हटने से इनकार कर दिया था. बस्तियाँ हटाने के लिए सरकार ने मंगलवार की रात तक की समयसीमा निर्धारित की थी जिसके लिए वहाँ सभी लोगों को नोटिस दिया गया था. उस समय सीमा की समाप्ति के बाद वहाँ उन लोगों का ठहरना ग़ैरक़ानूनी हो गया है. सैनिकों ने यहूदी प्रदर्शनकारियों को गज़ा की सबसे बड़ी बस्ती नेवे दाकालिम के यहूदी उपासनागृह से भी बाहर निकाला जो दो दिन से वहाँ से बाहर नहीं आ रहे थे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इनमें से अधिकतर युवक थे जो वहाँ प्रार्थना कर रहे थे. उनका कहना है कि सैनिकों पर कुछ बोतलें ज़रूर फेंकी गईं लेकिन कोई ख़ास हिंसा नहीं हुई. यहूदी परिवारों को पहले ही बलपूर्वक इस बस्ती से बाहर निकाला जा चुका है. बलपूर्वक बाहर निकला जाने वाला आख़िरी परिवार था एक युवा महिला और उसकी दो बच्चियों का जिसे घसीटकर एक बस में बिठाया गया. गुरूवार को ग़ज़ा पट्टी से इसराइलियों को निकालने कार्रवाई के तहत इसराइली सैनिकों ने बुलडोज़रों के साथ कट्टर यहूदियों की एक बस्ती में प्रवेश किया. कफ़ार दारोम नामक इस बस्ती में 2000 से ज़्यादा कट्टरपंथी यहूदियों थे. इस बस्ती में लोगों ने ख़ुद को कंक्रीट के अवरोधकों और काँटेदार बाड़ के पीछे सीमित कर लिया.
इससे पहले इसराइली अधिकारियों ने कहा कि ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने का काम उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से चल रहा है और 21 में से आधी से ज़्यादा बस्तियों को ख़ाली करा लिया गया है. शेरॉन का आश्वासन इसराइल के उपप्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने बीबीसी को बताया कि अगर फ़लस्तीनी लोग 'आतंकवाद' रोक दें तो पश्चिमी तट से भी यहूदी बस्तियाँ हटाने के मुद्दे पर बातचीत हो सकती है. इसराइली सैनिक घरों, स्कूलों और यहूदी उपासना स्थलों से सैंकड़ो लोगों को जबरन निकाल कर बसों पर इलाक़े से बाहर ले गए. बलपूर्वक बस्तियों से निकाले गए अनेक यहूदी रोते देखे गए. सेना की कार्रवाई के पहले दिन बुधवार को हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई. हलाँकि कई जगह युवाओं ने ग़ज़ा में 38 वर्षो से जमी रिहाइश उजाड़े जाने का जमकर विरोध किया. इस बीच इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि बस्तियाँ ख़ाली कराए जाने के द्रवित करने वाले दृश्यों के बावजूद ग़ज़ा पट्टी खाली करने के इसराइल के फ़ैसले से सुरक्षा स्थिति में सुधार होगा. ग़ज़ा पट्टी छोड़ने वाले यहूदियों को काफ़ी बड़ा मुआवज़ा दिया जा रहा है और सरकार ने उन्हें नई जगह पर बसने में मदद का भी आश्वासन दिया है. |
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