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फ़लस्तीनी चरमपंथी कार्यदल में शामिल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन उस कार्यदल में शामिल हो गए हैं जो फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने ग़ज़ा पट्टी इलाक़े से यहूदी बस्तियाँ हटाने के बाद उस इलाक़े के स्थानांतरण की निगरानी के लिए बनाया है. ग़ौरतलब है कि ग़ज़ा पट्टी में यहूदी बस्तियाँ हटाई जा रही हैं और वहाँ क़रीब दस लाख फ़लस्तीनी भी रहते हैं. इस कार्यदल में मुख्य फ़लस्तीनी राजनीतिक दल फ़तह, चरमपंथी संगठन हमास और इस्लामिक जेहाद शामिल हैं. इस कार्यदल का मक़सद ग़ज़ा इलाक़े और बस्तियों में मौजूद सामान की हिफ़ाज़त करना भी होगा. ग़ज़ा में एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चरमपंथी संगठनों का समर्थन मिलने से महमूद अब्बास को ग़ज़ा इलाक़े के शांतिपूर्ण स्थानांतरण में मदद मिलेगी. हालाँकि ग़ज़ा बस्तियों के आसपास क़रीब सात हज़ार सुरक्षा जवान तैनात हैं लेकिन अगर उन्हें वहाँ शांति और व्यवस्था बनाए रखने में मुश्किलें आईं तो ऐसे में कार्यदल में विभिन्न संगठनों के बीच तालमेल असरदार साबित होगा. फ़लस्तीनी लोग ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाए जाने पर ख़ुश हैं और जश्न मना रहे हैं. फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद कुरई ने ग़ज़ा शहर की साफ़-सफ़ाई और दीवारों पर पुताई कराने और राजनीतिक पोस्टरों को हटाने के लिए एक अभियान शुरू किया है. 1967 की लड़ाई के दौरान इसराइली सेना ने मिस्र और जॉर्डन से गज़ा पट्टी और पश्चिमी तट का इलाक़ा छीन लिया था और वहाँ यहूदी बस्तियाँ बसा दी थीं. बल प्रयोग इसराइली सेना और पुलिस के हज़ारों जवानों ने ग़ज़ा पट्टी में यहूदी बस्तियाँ बलपूर्वक हटाने का अभियान शुरू कर दिया है.
ग़ौरतलब है कि ग़ज़ा में बसे यहूदियों को वहाँ से हटने के लिए मंगलवार आधी रात तक का समय दिया गया था लेकिन बहुत से लोगों ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया और वहाँ से नहीं हटे हैं. समय सीमा गुज़र जाने के बाद बुधवार सुबह इसराइली सेना और पुलिस के दस हज़ार से भी ज़्यादा जवानों ने बलपूर्वक बस्तियाँ हटाने का अभियान शुरू किया. ग़ज़ा में अब बचे बाक़ी लोगों का वहाँ ठहरना ग़ैरक़ानूनी हो गया है. बुधवार का सूरज निकलते ही सैनिक इसराइली बैरकों से ग़ज़ा के लिए रवाना हो गए. वैसे इसराइली सरकार का कहना है कि गज़ा पट्टी में रहनेवाले लगभग 9000 यहूदियों में से लगभग आधे लोगों ने बस्तियाँ ख़ाली कर दी हैं. सुरक्षा बलों ने बुधवार सुबह ग़ज़ा में यहूदी बस्तियों में घुसना शुरू कर दिया और सबसे पहले वे सबसे बड़ी बस्ती नेवे देकालिम में दाख़िल हुए. इसी बस्ती में मंगलवार को सुरक्षा बलों और लोगों के बीच झड़पें हुई थीं. वहाँ बहुत से लोग बस्ती ख़ाली कराने का विरोध करने के लिए एकत्र हो गए थे और उन्होंने वहाँ प्रार्थनाएँ भी कीं. कुछ लोगों ने रास्तों पर बाधाएँ भी खड़ी कीं. इसराइल के उपप्रधानमंत्री शिमोन पेरेज़ ने बीबीसी से कहा कि यह इसराइली लोकतंत्र के लिए एक महान दिन था क्योंकि इससे साबित होता है कि गंभीर विरोध के बावजूद मुश्किल फ़ैसले भी लिए जा सकते हैं. इससे पहले इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने ग़ज़ा पट्टी में यहूदी बस्तियाँ हटाने के फ़ैसले को दुखदायी लेकिन राष्ट्र के लिए ज़रूरी प्रक्रिया बताया है. |
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