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मंगलवार, 16 अगस्त, 2005 को 06:22 GMT तक के समाचार
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ग़ज़ा में यहूदियों और सैनिकों में टकराव
ग़ज़ा से हटने का विरोध करते लोग
ग़ज़ा में हज़ारों यहूदी अरियल शेरॉन के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हैं
ग़ज़ा पट्टी की यहूदी बस्तियों में सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव के समाचार मिल रहे हैं.

इन बस्तियों के निवासियों को वहाँ से हटने के लिए स्थानीय समय के अनुसार मंगलवार आधी रात तक की मोहलत दी गई है.

अब तक लगभग साढ़े आठ हज़ार यहूदी गज़ा पट्टी से हट चुके हैं लेकिन अब भी वहाँ हज़ारों लोग मौजूद हैं जो इसराइली सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं.

इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग समय सीमा के बीत जाने के बाद वहाँ से नहीं हटेंगे उन्हें बलपूर्वक हटा दिया जाएगा.

ग़ज़ा पट्टी की सबसे बड़ी यहूदी बस्ती नेवे देकलीम में कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है, ये लोग सेना के ट्रकों को बस्ती के अंदर घुसने से रोकने की कोशिश कर रहे थे.

टेलीविज़न पर दिए भाषण में इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा कि ये दर्दनाक प्रकिया है लेकिन देश के भविष्य के लिए ज़रूरी है.

शेरॉन ने कहा, "हम ग़ज़ा में हमेशा के लिए नहीं रह सकते. वहाँ दस लाख से ज़्यादा फ़लस्तीनी रहते हैं और हर पीढ़ी के साथ उनकी संख्या दोगुनी हो जाती है."

अरियल शेरॉन ने फ़लस्तीन को चेतावनी भी दी कि अगर उसने चरमपंथी संगठनों पर कार्रवाई नहीं की तो इसराइल भी जवाबी कार्रवाई करेगा.

ऐतिहासिक क़दम

इससे पहले सोमवार को ग़ज़ा में कई लोगों ने सैनिकों से कहा कि वे बस्तियाँ खाली करवाने का आदेश न मानें. इस भावुक मौके पर सैनिकों समेत कई लोगों की आँखे नम थीं.

सैनिक और कर्मचारी
बस्ती ख़ाली करने की समय सीमा जल्द ही समाप्त हो रही है

ज़्यादातर विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे लेकिन कुछ इलाकों में हिंसा की ख़बर भी आई है.

जब लोगों के पता चला कि वो एक साथ एक समुदाय की तरह नहीं जा सकते तो कई लोग भड़क उठे. कुछ लोगों का कहना था कि ये पूरी प्रकिया अनैतिक है.

ग़ज़ा के 8500 लोगों में से क़रीब 50 प्रतिशत लोग बस्तियाँ खाली कर चुके हैं.

1967 में हुए युद्ध में इसराइल ने ये इलाक़े छीन लिए थे और उसके बाद से ये पहली बार है कि इसराइल फ़लस्तीनी ज़मीन पर से हटने के लिए तैयार हुआ है.

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने इसे ऐतिहासिक क़दम बताया है.

इसराइल के ग़ज़ा से हटने पर फ़लस्तीन में जश्न मनाया गया. चरमपंथी गुट हमास ने इस अवसर पर विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया जिसमें कई लोगों ने हिस्सा लिया.

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