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ग़ज़ा बस्तियाँ ख़ाली कराने का काम शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सेना और पुलिस के हज़ारों जवानों ने ग़ज़ा पट्टी में यहूदी बस्तियाँ बलपूर्वक हटाने का अभियान शुरू कर दिया है. ग़ौरतलब है कि ग़ज़ा में बसे यहूदियों को वहाँ से हटने के लिए मंगलवार आधी रात तक का समय दिया गया था लेकिन बहुत से लोगों ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया और वहाँ से नहीं हटे हैं. समय सीमा गुज़र जाने के बाद बुधवार सुबह इसराइली सेना और पुलिस के दस हज़ार से भी ज़्यादा जवानों ने बलपूर्वक बस्तियाँ हटाने का अभियान शुरू किया. ग़ज़ा में अब बचे बाक़ी लोगों का वहाँ ठहरना ग़ैरक़ानूनी हो गया है. बुधवार का सूरज निकलते ही सैनिक इसराइली बैरकों से ग़ज़ा के लिए रवाना हो गए. वैसे इसराइली सरकार का कहना है कि गज़ा पट्टी में रहनेवाले लगभग 9000 यहूदियों में से लगभग आधे लोगों ने बस्तियाँ ख़ाली कर दी हैं. सुरक्षा बलों ने बुधवार सुबह ग़ज़ा में यहूदी बस्तियों में घुसना शुरू कर दिया और सबसे पहले वे सबसे बड़ी बस्ती नेवे देकालिम में दाख़िल हुए. इसी बस्ती में मंगलवार को सुरक्षा बलों और लोगों के बीच झड़पें हुई थीं. वहाँ बहुत से लोग बस्ती ख़ाली कराने का विरोध करने के लिए एकत्र हो गए थे और उन्होंने वहाँ प्रार्थनाएँ भी कीं. कुछ लोगों ने रास्तों पर बाधाएँ भी खड़ी कीं. इसराइल के उपप्रधानमंत्री शिमोन पेरेज़ ने बीबीसी से कहा कि यह इसराइली लोकतंत्र के लिए एक महान दिन था क्योंकि इससे साबित होता है कि गंभीर विरोध के बावजूद मुश्किल फ़ैसले भी लिए जा सकते हैं. इससे पहले इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने ग़ज़ा पट्टी में यहूदी बस्तियाँ हटाने के फ़ैसले को दुखदायी लेकिन राष्ट्र के लिए ज़रूरी प्रक्रिया बताया है. झड़प और गिरफ़्तारी सबसे पहली यहूदी बस्ती जिसे ख़ाली करा लिया गया है उसका नाम है दुगित जहाँ लगभग 80 लोग रहते थे. लेकिन बाक़ी की लगभग 20 बस्तियों में प्रधानमंत्री शेरॉन की इस योजना का बहुत विरोध हो रहा है, कई बस्तियों से सुरक्षा बलों और स्थानीय बाशिंदों के बीच टकराव होने के समाचार मिले हैं. कुल मिलाकर लगभग 50 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है, सबसे बड़ी बस्ती नेवे देकलीम से हिंसक झड़पों के समाचार मिले हैं. नेवे देकलीम में अब भी बड़ी संख्या में लोग हैं जो वहाँ से निकलने को तैयार नहीं हैं और बड़ी संख्या में इसराइल के दूसरे हिस्सों से यहूदी आए हैं जो उनके साथ मिलकर इसका विरोध कर रहे हैं. फ़लस्तीनी जैसे-जैसे ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटने की समय सीमा पास आती जा रही है फ़लस्तीनी अरब लोग सड़कों पर उतरकर ख़ुशियाँ मना रहे हैं. मंगलवार को दिन में चरमपंथी संगठन हमास ने एक रैली का आयोजन किया जिसमें हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. हमास के समर्थकों ने ग़ज़ा और इसराइली इलाक़े बीच बनाई गई दीवार के ऊपर फ़लस्तीनी झंडे लगा दिए. फ़लस्तीनी नेताओं ने इस मौक़े पर ग़ज़ा की सफ़ाई का अभियान शुरू कर दिया है जिसमें प्रधानमंत्री अहमद कुरई सहित कई बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया. इन लोगों ने दीवारों पर लिखे यहूदी नारों और पोस्टरों को मिटाने के अलावा सड़कों की सफ़ाई भी की. प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने दो वर्ष पहले गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना बनाई थी, जिसे काफ़ी विरोध के बाद संसद और मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिली. इस फ़ैसले के विरोध में उनकी सरकार के वित्त मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने इस्तीफ़ा दे दिया. 1967 की लड़ाई के दौरान इसराइली सेना ने मिस्र और जॉर्डन से गज़ा पट्टी और पश्चिमी तट का इलाक़ा छीन लिया था और वहाँ यहूदी बस्तियाँ बसाना शुरू किया था. |
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