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क्या है अरियल शेरॉन की ग़ज़ा योजना? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अरियल शेरॉन की जिस ग़ज़ा योजना के तहत यहूदी बस्तियों को वहाँ से हटाया गया है वह पहली बार 2002 में सामने आई थी. इसे संसद और मंत्रिमंडल की मंज़ूरी हासिल है. आइए जानते हैं क्या है ग़ज़ा योजना और उससे जुड़े कुछ और सवालों के जवाब. इसराइली प्रधानमंत्री की ये योजना आख़िर है क्या? अरियल शेरॉन की इस योजना में ग़ज़ा पट्टी से इसराइली सैनिकों और बस्तियों की वापसी की बात कही गई है. इसी योजना के तहत वहाँ बसे हुए आठ हज़ार यहूदियों को भी ग़ज़ा से हटाया गया. 1967 में फ़लस्तीनी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके बसाई गई इन यहूदी बस्तियों को इस योजना के तहत पहली बार हटाया गया है, विडंबना ये है कि ये बस्तियाँ 1990 के दशक में आवास मंत्री के रूप में अरियल शेरॉन ने ही बसवाईं थीं. शेरॉन का कहना है कि फ़लस्तीनियों के चरमपंथी हमलों से इसराइलियों की सुरक्षा इसी तरह संभव हो सकती है. महत्वपूर्ण बात ये है कि ग़ज़ा से तो हटने का शेरॉन का इरादा है लेकिन पश्चिमी तट पर बसी दर्जनों बस्तियों पर इसराइल अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहता है. इस योजना को किस तरह के विरोध का सामना करना पड़ा? शेरॉन को अपनी लिकुद पार्टी से ही भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जहाँ इस योजना को लेकर भारी मतभेद सामने आ चुके हैं. शेरॉन मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री और पहले प्रधानमंत्री रह चुके बिनयामिन नेतनयाहू ने इन बस्तियों को हटाए जाने का आदेश दिए जाने के फ़ौरन बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. लिकुद पार्टी दो बार उनकी इस योजना को नामंज़ूर कर चुकी है लेकिन मंत्रिमंडल की मंज़ूरी इस योजना को मिल चुकी है, और इसलिए शेरॉन का ये दावा है कि आम तौर पर इसराइली उनकी योजना का समर्थन करते हैं.
सरकार में इस योजना को लेकर ध्रुवीकरण इस वजह से है कि शेरॉन की अपनी लिकुद पार्टी में दो तरह के राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं. एक इस योजना के विरोध में और एक इसके पक्ष में, लिकुद पार्टी के मंत्री नेथान शिरांस्की बताते हैं कि इस योजना से आतंकवाद के खिलाफ़ चल रही उनकी लड़ाई अपना मतलब खो बैठेगी. लेकिन शेरॉन समर्थक और संसद की रक्षा मामलों की समिति के प्रमुख युवाल सटाइनित्ज़ इस योजना के पक्ष में हैं. उनका कहना है कि एकतरफ़ा वापसी का फ़ैसला मुश्किल ज़रूर साबित होगा लेकिन यह सही है. चरमपंथी गतिविधियाँ तो ग़ज़ा से वापसी के बाद भी जारी रहेंगी. किस तरह लागू की गई योजना? ग़ज़ा पट्टी की लगभग 20 यहूदी बस्तियों में बसे आठ हज़ार लोगों को 16 अगस्त की आधी रात तक बस्तियाँ ख़ाली करने का आदेश दिया गया. लगभग आधे लोगों ने नियत समयसीमा के भीतर अपने घर खाली कर दिए लेकिन इसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ. बुधवार 17 अगस्त से इसराइली सुरक्षा बलों ने लोगों जबरन हटाने का काम शुरू कर दिया. ग़ज़ा पट्टी से हटाए जा रहे लोगों को उनके घरों और अन्य सामान के लिए ख़ासा मुआवज़ा दिया गया है और सरकार ने वादा किया है कि अगले दो वर्षों तक उन्हें नई जगह पर घर बसाने के लिए भरपूर सहायता दी जाएगी. ग़ज़ा योजना लागू होने पर क्या प्रतिक्रिया रही है? प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने इसे एक दुखद लेकिन ज़रूरी कार्रवाई बताया है, उनका कहना है कि यहूदी बस्तियों को फ़लस्तीनी चरमपंथियों के हमलों से बचाने के लिए ज़रूरी है कि बस्तियाँ वहाँ से हटाई जाएँ. यहूदी बस्तियों को हटाने का विरोध न सिर्फ़ वहाँ रहने वाले लोगों ने किया बल्कि बहुत बड़ी संख्या में इसराइल के दूसरे हिस्सों से आए लोगों ने किया लेकिन माना जाता है कि बहुत बड़ी संख्या में इसराइली इसका समर्थन भी करते हैं. फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने कहा है कि यह उसकी नीतियों की जीत है, साथ ही उसने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने पश्चिमी तट में बस्तियाँ बसानी जारी रखीं तो उसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा. शीर्ष फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने इसका स्वागत किया है और कहा है कि यह एक अच्छी शुरूआत है. कई अरब देशों की ओर से भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है. |
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