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मध्य पूर्व पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल और फ़लस्तीन के बीच का विवाद उन पर ही छोड़ दिया जाए तो यह कभी हल नहीं हो सकता. संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक मामलों के वरिष्ठ अधिकारी कीरन प्रेंडरगास्ट ने सुरक्षा परिषद में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मध्य पूर्व मामले में और ज़्यादा दिलचस्पी लेनी चाहिये. उन्होंने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व का मसला इन दोनों के ऊपर नहीं छोड़ा जाना चाहिए. कीरन प्रेंडरगास्ट ने सुरक्षा परिषद् में कहा कि इसराइली लोगों और फ़लस्तीनियों के बीच संपर्क का माध्यम इस समय विचार-विमर्श नहीं बल्कि हिंसा है. उन्होंने कहा कि दोनों में से कोई भी पक्ष रोडमैप के नाम वाली शांति योजना के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभा रहा है. हिंसा प्रेंडरगास्ट ने कहा कि ग़ज़ा से फ़लस्तीनियों के रॉकेट हमले की प्रतिक्रिया में इसराइल की सैनिक कार्रवाई के बाद वहाँ हिंसा बहुत तेज़ी से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी प्रशासन को इसराइली ठिकानों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिये हरसंभव कोशिश करनी चाहिए.
प्रेंडरगास्ट ने इसराइल से भी अपील की कि वह ज़रूरत से ज़्यादा ताक़त का इस्तेमाल करने से बचे. उन्होंने कहा कि दो सप्ताह के दौरान इसराइल की सैनिक कार्रवाई में उत्तरी ग़ज़ा में 114 फ़लस्तीनी मारे गये जिनमें बहुत से आम नागरिक थे और बच्चे भी थे. इसराइल ने अधिकृत क्षेत्रों में आवागमन पर जो प्रतिबंध लगाए, उसके कारण प्रेंडरगास्ट ने कहा कि एजेंसी को अपनी कई गतिविधियाँ स्थगित करनी पड़ीं जिसका प्रभाव खाने पीने के सामान की आपूर्ति पर भी पड़ा है. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के सफल न होने पर निराशा का एक कारण यह भी है कि इसराइल और फ़लस्तीन में दो राष्ट्रों के सह-अस्तित्व के सिद्धांत को व्यापक समर्थन प्राप्त है. |
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