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ग़ज़ा योजना से हिंसा में कमी आएगी: शेरॉन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली संसद में ग़ज़ा योजना पर बहस शुरू करते हुए प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद वे इस योजना को आगे ले जाना चाहते हैं. शेरॉन ने कहा कि वे उन हज़ारों यहूदी लोगों की पीड़ा समझ सकते हैं जिन्हें ख़ुद सरकार ने वहाँ बसने के लिए भेजा था. सदस्यों की टोका-टाकी के बीच प्रधानमंत्री शेरॉन ने कहा कि इस योजना से हिंसा में कमी आएगी और फ़लस्तीनियों के साथ शांति प्रक्रिया में प्रगति होगी. इस योजना पर मंगलवार को मतदान होगा. इस बीच दक्षिणी ग़ज़ा के ख़ान यूनिस शरणार्थी शिविर में एक इसराइली हमले में कम से कम 14 फ़लस्तीनी मारे गए हैं और अन्य कई घायल हो गए हैं. यह अभियान रविवार को हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ और उसके बाद कई इसराइली टैंक क्षेत्र में घुस आए. इसराइली सेना का कहना है कि वह चरमपंथियों को आसपास के इसराइली ठिकानों पर मोर्टार गोलों से हमला करने से रोकने की कोशिश कर रही है. यह क़दम ऐसे समय उठा है जब संसद में ग़ज़ा से बाहर निकलने की योजना पर बहस हो रही है. सुरक्षा-व्यवस्था प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन का तर्क है कि ग़ज़ा से सभी यहूदी बस्तियों को हटाने के बाद इसराइल की सुरक्षा आसान हो जाएगी.
ग़ज़ा में बीबीसी के ऐलन जॉंन्सटन का कहना है कि इसराइल के बाहर निकलने की संभावना ने क्षेत्र में हिंसा को और बढ़ा दिया है. हमारे संवाददाता का कहना है कि चरमपंथी इसराइलियों के बाहर निकलने को गोलीबारी से घबरा कर पलायन का रंग देना चाहते हैं. जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिले हैं कि अधिकतर इसराइली शेरॉन की योजना का समर्थन करते हैं लेकिन शेरॉन इस मसले पर जनमत संग्रह या जल्दी आम चुनाव कराने के लिए राज़ी नहीं हैं. उनका कहना है कि ऐसा करने से बस्तियों को हटाने के काम में देरी होगी. |
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