|
सैनिक आख़िरी यहूदी बस्ती में घुसे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सैनिक और पुलिस फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी में बाक़ी बची यहूदी बस्तियाँ हटाने के अभियान के तहत आज गैडिड नामक बस्ती में घुस गए हैं जहाँ उन्हें कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है. वहाँ पर अब भी कुछ लोग बस्तियाँ ख़ाली करने के लिए तैयार नहीं हैं और इसराइली सुरक्षा बलों से भिड़ रहे हैं. गैडिड बस्ती के कुछ निवासी तो अपने घरों की छतों पर चढ़ गए और उन्होंने इसराइली सैनिकों को "नाज़ी" तक कहा. गैडिड ग़ज़ा पट्टी की उन पाँच यहूदी बस्तियों में से आख़िरी है जहाँ के लोग ख़ाली कराने के सरकारी नोटिस का विरोध कर रहे हैं. इसराइली सैनिकों ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि वे अगले सप्ताह तक ग़ज़ा से तमाम यहूदी बस्तियाँ हटाने का काम पूरा कर लेंगे. इससे पहले गुरूवार को ग़ज़ा पट्टी में यहूदियों की दो बस्तियों को ख़ाली करा लिया है जहाँ प्रबल विरोध हो रहा था. क्फार दारूम बस्ती में हिंसक विरोध के बाद सौ से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया था. बलपूर्वक बस्तियाँ ख़ाली कराने की कार्रवाई के दूसरे दिन सैनिकों ने नेवे देकालिम नामक बस्ती के एक उपासनागृह पर छापा मारकर सैकड़ों लोगों को बलपूर्वक बाहर निकाला है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इनमें से अधिकतर युवक थे जो वहाँ प्रार्थना कर रहे थे. इन युवकों ने सैनिकों पर बोतलें फेंकी लेकिन कोई ख़ास हिंसा नहीं हुई. हालाँकि यहूदी प्रदर्शनकारियों और सैनिकों के बीच सबसे तीखी झड़प कफ़ार दारोम नामक बस्ती में हुई. सैनिकों ने इस बस्ती को भी जबरन खाली कराया. इस बस्ती में 2000 से ज़्यादा कट्टरपंथी यहूदी एकजुट थे. इसाराइली सरकार के गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने की नीति के अंतर्गत वहाँ यह कार्रवाई की जा रही है. तीन चौथाई बस्तियाँ ख़ाली बस्तियाँ हटाने के लिए सरकार ने मंगलवार की रात तक की समयसीमा निर्धारित की थी जिसके लिए वहाँ सभी लोगों को नोटिस दिया गया था. इसराइल सरकार के अनुसार निर्धारित समय सीमा के बाद वहाँ उन लोगों का ठहरना ग़ैरक़ानूनी है. तय समय सीमा में जो लोग ख़ुद बस्तियाँ ख़ाली कर के नहीं गए उन्हें बलपूर्वक निकालने की कार्रवाई बुधवार तड़के शुरू की गई. इसराइली अधिकारियों के अनुसार गुरुवार तक तीन चौथाई बस्तियाँ ख़ाली हो चुकी थीं. इस बीच इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि बलपूर्वक लोगों को हटाए जाने के द्रवित करने वाले दृश्यों के बावजूद ग़ज़ा पट्टी खाली करने के इसराइल के फ़ैसले से सुरक्षा स्थिति सुधरेगी. ग़ज़ा पट्टी छोड़ने वाले यहूदियों को भारी आर्थिक मुआवज़ा दिया जा रहा है. सरकार उन्हें नई जगह पर बसने में पूरी मदद भी कर रही है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||