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कट्टरपंथियों की दो बस्तियाँ खाली कराई गई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सेना ने कहा है कि उसने ग़ज़ा पट्टी में कट्टरपंथी यहूदियों की दो बस्तियों को खाली करा लिया है. बलपूर्वक बस्तियाँ खाली कराने की कार्रवाई के दूसरे दिन सैनिकों ने नेवे देकालिम नामक बस्ती के एक उपासनागृह पर छापा मारकर सैकड़ों लोगों को बलपूर्वक बाहर निकाला है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इनमें से अधिकतर युवक थे जो वहाँ प्रार्थना कर रहे थे. इन युवकों ने सैनिकों पर बोतलें फेंकी लेकिन कोई ख़ास हिंसा नहीं हुई. हालाँकि यहूदी प्रदर्शनकारियों और सैनिकों के बीच सबसे तीखी झड़प कफ़ार दारोम नामक बस्ती में हुई. सैनिकों ने इस बस्ती को भी जबरन खाली कराया. इस बस्ती में 2000 से ज़्यादा कट्टरपंथी यहूदी एकजुट थे. इसाराइली सरकार के गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने की नीति के अंतर्गत वहाँ यह कार्रवाई की जा रही है. तीन चौथाई बस्तियाँ खाली बस्तियाँ हटाने के लिए सरकार ने मंगलवार की रात तक की समयसीमा निर्धारित की थी जिसके लिए वहाँ सभी लोगों को नोटिस दिया गया था. इसराइल सरकार के अनुसार निर्धारित समय सीमा के बाद वहाँ उन लोगों का ठहरना ग़ैरक़ानूनी है. तय समय सीमा में जो लोग ख़ुद बस्तियाँ खाली कर के नहीं गए उन्हें बलपूर्वक निकालने की कार्रवाई बुधवार तड़के शुरू की गई. इसराइली अधिकारियों के अनुसार गुरुवार तक तीन चौथाई बस्तियाँ खाली हो चुकी थीं. इस बीच इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि बलपूर्वक लोगों को हटाए जाने के द्रवित करने वाले दृश्यों के बावजूद ग़ज़ा पट्टी खाली करने के इसराइल के फ़ैसले से सुरक्षा स्थिति सुधरेगी. ग़ज़ा पट्टी छोड़ने वाले यहूदियों को भारी आर्थिक मुआवज़ा दिया जा रहा है. सरकार उन्हें नई जगह पर बसने में पूरी मदद भी कर रही है. |
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