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इसराइली सेना पश्चिमी तट की बस्तियाँ में दाख़िल हुई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गज़ा पट्टी को खाली करवाने के बाद इसराइली सैनिक और पुलिसकर्मी पश्चिमी तट की दो यहूदी बस्तियाँ को खाली करवाने के लिए वहाँ दाख़िल हुए हैं. उन्होंने होमेश और सा-नूर बस्तियों की सड़कों पर लगाई गई काँटे वाली तार और नाकों को बुलडोज़रों से हटाना शुरु कर दिया है. सरकार के इस अभियान में दस हज़ार सैनिक और पुलिसकर्मी भाग ले रहे हैं. इन बस्तियों में लगभग 2000 कट्टरपंथी यहूदी एकत्र हो गए हैं जिनके पास कुछ देसी हथियार हैं. माना जा रहा है कि सेना को इन लोगों से भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन बस्तियों में रहने वाले लोग अपने हथियार सरकार को सौंप चुके हैं. अब्बास-शेरॉन बातचीत ग़ज़ा की बस्तियों को खाली करवाने के लिए भी सैनिक भेजे गए थे लेकिन वे सशस्त्र नहीं थे. वहाँ बसे लोगों की ओर से कुछ विरोध के बाद ग़ज़ा की सभी 21 बस्तियों को ख़ाली करवा लिया गया. ग़ज़ा से बस्तियाँ पूरी तरह ख़ाली करवाए जाने के बाद फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से दो महीने के बाद फ़ोन पर सीधी बात की. प्रधानमंत्री शेरॉन के कार्यालय ने बताया कि फ़लस्तीनी नेता ने उम्मीद जताई है कि इस क़दम से रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू होगा.
अमरीका के राष्ट्रपति बुश ने भी ग़ज़ा से बस्तियाँ ख़ाली किए जाने की सराहना की है. ग़ज़ा में सबसे आख़िर में नेत्ज़ारिम इलाक़े को ख़ाली करवाया गया. बस्ती ख़ाली करवाए जाने से पहले लोगों ने मिलकर प्रार्थना की. नेतज़रीम की इस बस्ती को लेकर फ़लस्तीनी लोगों में काफ़ी कटुता है. इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ग़ज़ा में सैनिकों से मिलने गए और उनके काम की तारीफ़ की. उन्होंने बस्तियाँ ख़ाली करने वालों की भी प्रशांसा की और कहा कि ये एक दर्दनाक स्थिति है. इस बीच ग़ज़ा में बस्तियाँ गिराने का काम जारी है. ये काम कई हफ़्तों तक चलेगा और फ़लस्तीनी प्रशासन की सहमति से किया जा रहा है. सेना का इस इलाक़े को पूरी तरह छोड़ने का काम क़रीब एक महीने में पूरा होगा. फ़लस्तीन प्रशासन इस इलाक़े का उपयोग लोगों के लिए नए घर बनाने में करेगा. |
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