| 'ये संघर्ष है अगली पीढ़ी के लिए' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेहनत से काम करने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर कई एशियाई हर साल ब्रिटेन आते हैं. ऐसे ही सपनों के टूटने की दास्तां हैं गेट गोर्मे कंपनी और उसके कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद. गेट गोर्मे के दफ़तर के बाहर इन टूटे हुए सपनो को फिर से संजोने की कोशिश करते मुझे सैकड़ों लोग मिले. ये लोग गेट गोर्मे से बर्ख़ास्तगी का विरोध कर रहे थे. ब्रिटेन की कई एयरलाइनों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था करने वाली कंपनी गेट गोर्मे के क़रीब 600 कर्मचारियों को कुछ दिन पहले बर्ख़ास्त कर दिया गया था. कंपनी का कहना था कि ये लोग अनौपचारिक हड़ताल पर चले गए जिसके बाद इन्हें बर्ख़ास्त किया गया. बर्ख़ास्त किए गए कर्मचारियों में क़रीब 70 प्रतिशत एशियाई मूल की महिलाएँ हैं जिनमें से ज़्यादातर भारतीय राज्य पंजाब से हैं. मेरी मुलाक़ात हुई ममता भाटिया से जो कहती है कि उन्हें बिना चेतावनी के 2-3 मिनटों के भीतर ही बर्ख़ास्त कर दिया था. इन महिलाओं को बर्ख़ास्तगी का तो मलाल है ही साथ ही उनका यह भी कहना है कि बर्ख़ास्त किए जाने के बाद जिस तरह का सुलूक उनके साथ किया गया वो शर्मनाक था. कमलजीत कौर कहतीं हैं "हमें एक हॉल में बंद कर दिया और हमें बाहर जाने की इजाज़त नहीं थी. वहाँ इतनी सारी महिलाएँ थी मगर हमें टॉयलेट भी नहीं जाने दिया गया." खंडन मगर गेट गोर्मे इन आरोपों को ख़ारिज करती है. कंपनी का कहना है कि किसी भी समय कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवाहर नहीं किया गया था और उन्हें बर्ख़ास्त करने से पहले दो घंटो तक उनसे बातचीत की गई थी. कंपनी के चेयरमन और मुख्यकार्यकारी अधिकारी डेव सीगल कहते हैं,"कर्मचारी ग़ैरक़ानूनी हड़ताल पर थे और हमने कई घंटो तक उन्हें काम पर वापस लौटने को कहा. मगर वो काम पर वापस लौटने के लिए राज़ी नहीं हुए और इसलिए हमें ऐसा करना पडा. पर किसी भी वक़्त कर्मचारियों के साथ बुरा व्यहवार नहीं किया गया था." गेट गोर्मे और उसके कर्मचारियों के बीच ये विवाद यहीं तक ही सीमित नहीं रहा. हीथ्रो हवाई अड्डे पर तब अफ़रा-तफ़री मच गई जब गेट गोर्मे द्वारा बर्ख़ास्त कर्मचारियों के समर्थन में ब्रिटिश एयरवेज़ के कुछ नियमित कर्मचारी भी अचानक ही हड़ताल पर चले गए. इसके कारण ब्रिटिश एयरवेज़ से आने और जाने वाले 70 हज़ार यात्री प्रभावित हुए थे. यूरोपीय संघ के विस्तार के बाद पोलैंड से काम की तलाश में बड़ी तादाद में लोग ब्रिटेन आ रहे हैं. इन कर्मचारियों का कहना है कि उसकी गाज उनपर गिर रही है. कर्मचारियों कहना है कि ये बात यहीं तक ख़त्म नहीं होगी. अगर इस सिलसिले में पूरा एशियाई समुदाय एकजुट नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं. हीथ्रो हवाई अड्डे के क़रीब 70 हज़ार कर्मचारियों में से ज़्यादातर एशियाई मूल के हैं. उनके बिना हवाई अड्डे का काम-काज ठप्प हो सकता है वहीं आस-पास के इलाक़े की अर्थव्यवस्था भी बैठ जाएगी. |
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