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भारत में बैंक हड़ताल का व्यापक असर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बैंकों के विलय और प्रत्यक्ष विदेश निवेश के विरोध में देशभर के बैंक कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे और इस हड़ताल का व्यापक असर रहा. इस हड़ताल का आह्वान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की नौ यूनियनों ने किया था. लेकिन इस हड़ताल से निजी क्षेत्र के बैंकों का कामकाज प्रभावित नहीं हुआ. हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार निजी क्षेत्र के कुछ कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे. हड़ताल का आयोजन यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियन ने किया था. इससे बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की नौ यूनियनें संबद्ध हैं. हड़ताल का भारत की वित्तीय राजधानी माने जानेवाली मुंबई में ख़ासा असर रहा और वित्तीय कामकाज प्रभावित हुआ. माँगें बैंक यूनियनों की माँग है कि सरकार घरेलू बैंकों के विलय और अधिग्रहण की अपनी नीति को वापस ले. सरकार ने निजी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेश निवेश की सीमा 74 फीसदी कर दी है, यूनियनें इसका विरोध कर रही हैं. यूनियनों की माँग है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को मज़बूत करे. साथ ही सभी निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए. भारत के सरकारी बैंको को व्यापक पहुँच और ग्राहकों की भारी संख्या के बावजूद अब उन्हें निजी और विदेशी बैंको से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है. |
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