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बैंक दर में कोई बदलाव नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय रिज़र्व बैंक ने वर्ष 2004-05 के लिए अपनी कर्ज़ नीति की घोषणा कर दी है. बैंकों की ब्याज़ दर(सीआरआर) और रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है. रिज़र्व बैंक के गवर्नर वाई वी रेड्डी ने मुंबई में मंगलवार को छमाही मुद्रा और कर्ज़ नीति की घोषणा की. इसमें 2004-05 के लिए विकास दर साढ़े छह से सात प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान किया गया है. वाई वी रेड्डी ने उम्मीद जताई कि इस वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में भारत का स्थान शीर्ष देशों में बना रहेगा. रिज़र्व बैंक के अनुसार इस दौरान मुद्रास्फ़ीति की दर पाँच प्रतिशत के पास रह सकती है. बैंक ने कहा है कि देश में विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार मौजूद है. कीमतों के संबंध में पूछे जाने पर रिज़र्व बैंक ने कहा कि तेल की कीमतों और अन्य कुछ कारणों से आई समस्याओं के बावजूद इस वर्ष महंगाई को लेकर किसी गंभीर स्थिति के आने का अंदेशा नहीं है. वाई वी रेड्डी ने कहा कि मुद्रास्फ़ीति की स्थिति पर नज़र रखी जानी चाहिए और विश्व स्तर पर अनिश्चितता और ख़तरों को ध्यान में रखते हुए आत्मसंतुष्ट होने से बचना चाहिए. |
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