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बैंक ऑफ़ इंडिया पर भी गाज गिरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
1991 में बैंक ऑफ़ क्रेडिट एंड कॉमर्स इंटरनेशनल (बीसीसीआई) के डूबने के मामले में भारत के सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ़ इंडिया को अरबों रूपए का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया गया है. ब्रिटेन के एक उच्च न्यायालय ने बीसीसीआई मामले में जाँच के बाद आदेश दिया है कि बैंक ऑफ़ इंडिया क़रीब साढ़े चार करोड़ पाउंड स्टर्लिंग यानी क़रीब साढ़े तीन अरब रुपए का हर्जाना अदा करे. न्यायालय का कहना है कि बीसीसीआई के जमाकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में कुछ रक़म बैंक ऑफ़ इंडिया में भी जमा की गई थी. बैंक ऑफ़ इंडिया ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने की बात कही है. ग़ौरतलब है कि बीसीसीआई 1991 में डूब गया था और उस समय उस पर क़रीब सोलह अरब डॉलर की देनदारियाँ थीं. यह् बैंक डूबने का दुनिया का सबसे बड़ा मामला था. जज निकोलस पैटन ने कहा कि बैंक ऑफ़ इंडिया के लंदन दफ़्तर के प्रबंधक केएल सामंत को यह जानकारी थी कि बैंक की जमाराशि को छुपाया जा रहा था और वह रक़म को बीसीसीआई के देनदारों को धोखा देने के लिए इस्तेमाल किया गया. बीसीसीआई की तरफ़ से 1981 और 1985 के बीच छह बार रक़म जमा कराई गई. राज़ खुला भारत के सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन एम वेणुगोपालन ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि "बैंक इस फ़ैसला का विस्तार से अध्ययन करेगा और उसके ख़िलाफ़ अपील की जाएगी." बीसीसीआई के जमाकर्ताओं की तरफ़ से मुक़दमा लड़ रही कंपनी डेलायट एंड टच ने दलील दी है कि बीसीसीआई के क़र्ज़ों और घाटे को छुपाने के लिए बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ रक़म जमा की गई और निकाली गई. डेलायट एंड टच का कहना है कि बैंक ऑफ़ इंडिया ने यह लेन देन करके सबकुछ जानते हुए बीसीसीआई के कारोबार में हिस्सेदारी की और यह ऐसा लोगों को धोखा देने के इरादे से किया गया. बैंक ऑफ़ इंडिया ने इन आरोपों का खंडन किया है कि उसे ऐसे किसी मामले की जानकारी थी. जज ने डेलायट एंड टच को क़रीब चार करोड़ 32 लाख पाउंड का मुआवज़ा और तीन करोड़ 90 लाख पाउंड ब्याज के तौर पर दिए जाने का आदेश दिया है. डेलायट एंड टच बैंक ऑफ़ इंगलैंड के ख़िलाफ़ मुक़दमा लड़ रही है और उसने क़रीब 6500 जमाकर्ताओं की तरफ़ से क़रीब एक अरब पाउंड हर्जाने की माँग की है. बीसीसीआई के डूबने पर इनकी जमा राशि भी डूब गई थी. बीसीसीआई को पाकिस्तान के एक रईस आग़ा हसन आब्दी ने गठित किया था. आब्दी ने एक छोटा सा एशियाई बैंक शुरू करके वित्तीय बाज़ार में अपने क़दम जमाए थे. बाद में बीसीसीआई ने अपनी मौजूदगी 69 देशों में बनाई. |
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