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महँगाई कम होने का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष यानी मार्च 2004 तक की अवधि के लिए अपनी ऋण नीति की समीक्षा घोषित कर दी है जिसमें बैंक ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है. बैंक ने अपनी ऋण नीति की छमाही समीक्षा में यह भी अनुमान व्यक्त किया है कि अगले छह महीनों में महँगाई में कुछ कमी आएगी. बैंक ने अपनी ऋण नीति में नक़द जमा अनुपात यानी कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) में कोई बदलाव न करने की घोषणा की है. इस समय बैंक दर छह प्रतिशत और सीआरआर साढ़े चार प्रतिशत है. बैंक दर जितनी कम होती है लोगों को क़र्ज़ उसी दर पर मिलता है. रिजर्व बैंक के नए गवर्नर वाईवी रेड्डी ने सोमवार को मुंबई में मध्यावधि मुद्रा और ऋण नीति की घोषणा करते हुए मौजूदा वित्त वर्ष में साढ़े छह से सात प्रतिशत विकास दर रहने की भविष्यवाणी भी की है. बैंक दर और सीआरआर में बदलाव न करने के बारे में उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक उदार और लचीली ब्याज नीति के पक्ष में है. इस साल अप्रैल में रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर विमल जालान ने छह फ़ीसदी विकास दर रहने का अनुमान व्यक्त किया था. रेड्डी ने देश के बढ़ते वित्तीय घाटे पर चिंता जताई और कहा कि इस पर नियंत्रण करने के लिए ठोस क़दम उठाए जाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि सितंबर के अंत तक सरकार का वित्तीय घाटा क़रीब 810.14 अरब रुपए था जो पिछले साल इसी अवधि के मुक़ाबले 40 प्रतिशत ज़्यादा है. रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में बढ़ोतरी का आकलन इस साल देश में कृषि और उद्योग क्षेत्र में हुए विकास के आधार पर किया गया है. रेड्डी ने कहा, "अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की संभावना, उद्योग के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन और निर्यात में हुई बढ़ोतरी के कारण सकल घरेलू उत्पाद में साढ़े छह से सात प्रतिशत वृद्धि की बात करना तर्कसंगत है." मुद्रा स्फीति की दर के सामान्य बने रहने का अनुमान लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह चार से साढ़े चार प्रतिशत तक जा सकती है. पहले मुद्रा स्फीति की दर के पाँच से साढ़े पाँच फ़ीसदी तक जाने का आकलन किया गया था. प्रतिक्रिया रिजर्व बैंक की इस घोषणा पर उद्योग जगत ने उत्साहजनक टिप्पणी नहीं की है.
फ़िक्की में आर्थिक सलाहकार विवेक भारती का कहना है कि बैंक दर तो लगातार कम हो रहा है, लेकिन ब्याज दर में कमी नहीं आ रही है. बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "पिछले एक-डेढ़ साल में बैंक दर लगातार गिरा है, लेकिन ब्याज दर साढ़े ग्यारह से 14 प्रतिशत के बीच बना हुआ है. इसे कम करने की ज़रूरत है. क्योंकि ज़्यादातर लोगों का इसी से संबंध रहता है. जब तक ब्याज दर में कोई गिरावट नहीं आती, आप बैंक दर गिराकर कुछ नहीं कर सकते. मेरे ख़्याल से ब्याज दर में गिरावट से अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होगा." अर्थशास्त्री और आर्थिक सलाहकार डॉक्टर डीएच पाई पानिक्कर का मानना है कि रिजर्व बैंक की इस घोषणा का विधानसभा चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, "मैं ये नहीं मानता कि चुनाव के कारण बैंक दर में कमी नहीं की गई है. रिजर्व बैंक स्वतंत्र संस्था है. मुझे लगता है कि यह फ़ैसला गवर्नर का स्वतंत्र फ़ैसला है कि इस समय बैंक दर में कटौती की कोई ज़रूरत नहीं." |
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