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मंगलवार, 26 जुलाई, 2005 को 12:04 GMT तक के समाचार
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क्या है होंडा कंपनी का विवाद?
लाठीचार्ज
सोमवार को कर्मचारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प में कई लोग घायल हो गए थे
हरियाणा की औद्योगिक नगरी गुड़गाँव में एक मोटर साइकिल कंपनी होंडा के कर्मचारियों और पुलिस के बीच जो हिंसक झड़पें सोमवार, 25 जुलाई को हुईं वो प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच चले आ रहे पुराने विवाद की परिणति हैं.

गुड़गाँव के मानेसर में स्थित होंडा मोटर साइकिल एंड स्कूटर इंडिया लिमिटेड पर जापानी होंडा मोटर कंपनी की सौ फ़ीसदी की मिल्कियत है.

जैसा कि कर्मचारी बताते हैं कि प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच समस्या की शुरुआत दिसंबर, 2004 में हुई थी.

उनका कहना है कि उसी समय कर्मचारी यूनियन बनाने की कोशिशों में लगे हुए थे और कंपनी के प्रबंधन ने स्थानीय पत्रकारों को बताया था कि एक कर्मचारी ने कथित रुप से एक विदेशी अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया था.

स्थानीय पत्रकार मलिक असगर हाशमी बताते हैं कि प्रबंधन ने जनवरी, 2005 में चार कर्मचारियों को बर्ख़ास्त कर दिया था और 50 को निलंबित भी कर दिया था.

हाशमी बताते हैं कि प्रबंधन ने तब कहा था कि इन कर्मचारियों को इसलिए निकाला जा रहा है क्योंकि ये उत्पादन को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे.

लेकिन कर्मचारियों का पक्ष है कि यूनियन बनाने की कोशिशों की सज़ा के तौर पर इन पर कार्रवाई की गई.

पत्रकार हाशमी कहते हैं कि इसके बाद से कर्मचारी लगातार प्रदर्शन आदि में लगे हुए थे और दो महीने पहले उनके आंदोलन ने ज़ोर पकड़ लिया.

वे बताते हैं कि इस मामले में शुक्रवार को एक नया मोड़ तब आया जब कर्मचारियों ने एक प्रदर्शन रैली निकाली और प्रशासन ने उन्हें शहर की ओर आने से रोक दिया.

कर्मचारी तब तो रुक गए लेकिन उनका आरोप है कि प्रशासन ने पाँच कर्मचारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर कर दिया.

स्थानीय संवाददाताओं का कहना है कि प्रशासन सोमवार को जिस प्रदर्शन को धारा 144 का उल्लंघन बता रहा है उसके बारे में अभी यह स्पष्ट नहीं है किई धारा 144 शहर भर में कब लगाई गई थी.

संवाददाताओं का कहना है कि धारा 144 शहर के एक हिस्से में जुलाई पहले हफ़्ते में लगाई गई थी जब वामपंथी नेता गुरुदास दासगुप्ता आए थे और कर्मचारियों की रैली पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने इसकी घोषणा की थी.

प्रबंधन का रुख़

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार होंडा के प्रबंधन ने कह दिया है कि वे इस दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं लेकिन वे निकाले गए कर्मचारियों को वापस नहीं ले रहे हैं.

प्रबंधन का कहना है कि वे किसी भी कर्मचारी को तब तक वापस नहीं लेने वाले हैं जब तक कि उनके ख़िलाफ़ चल रही जाँच पूरी नहीं हो जाती.

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