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बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ हड़ताल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण अफ़्रीका में हज़ारों ने बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल में भाग लिया है. कुल मिला कर इस हड़ताल का मिलाजुला असर रहा है. बड़े शहरों में इससे सामान्य जीवन अपेक्षाकृत कम ही प्रभावित हुआ है. ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि रोज़ की तुलना में सड़कों पर यातायात आधा रह गया. कोसातु श्रमिक संघ ने बेरोज़गारी में हो रही वृद्धि के ख़िलाफ़ देश व्यापी हड़ताल का आह्वान किया था. एंग्लो गोल्ड अशांति के अधिकांश कोयला खदान कामगर हड़ताल पर रहे. दक्षिण अफ्रीका में फ़ोक्सवैगन मोटर कंपनी का भी कहना है कि हड़ताल से उसके उप्तादन पर असर पड़ा है. मगर ज़्यादातर शहरों में टैक्सी और रेल सेवाएं विशेष प्रभावित नहीं हुईं. विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में दक्षिण अफ्रीका में हड़तालें ख़ास सफल नहीं हुई हैं. बीबीसी के संवाददाता निक माइल्स का कहना है कि सोमवार की हड़ताल को श्रमिक संगठनों के शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है. श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह पिछले 15 सालों की सबसे बड़ी और प्रभावी हड़ताल हो सकती है जिसमें पांच लाख सदस्यों के भाग लेने की उम्मीद है. श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि फ़रवरी तक और भी कई हड़तालों की योजना बनाई गई है. कोसातु श्रमिक संगठन के नेताओं ने कई शहरों में विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किये हैं और जोहानसबर्ग में लगभघ दस हज़ार लोगों नें विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. कोसातु के प्रवक्ता पैट्रिक क्रेवन ने कहा है,"हम उद्दोग चलाने वालों कि मानसिकता बदलना चाहते हैं. उन्हें अल्पकालिक फ़ायदे के लिए नौकरियों में कटौति करने के बजाय नौकरियां बचाने के लिए काम करना चाहिए." सरकारी आंकड़ों के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में 25 प्रतिशत लोग बेरोज़गार हैं. कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह संख्या 40 प्रतिशत तक हो सकती है. हाल के वर्षों में दक्षिण अफ़्रीकी मुद्रा रैंड के कमज़ोर होने और आयातित वस्तुओं पर ड्यूटी शुल्क कम किए जाने से खदान और कपड़ा उद्दोग पर काफ़ी बुरा असर पड़ा है और बेरोज़गारी की दर बड़ी है. |
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