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बीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल टली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के कर्मचारियों ने अधिकारियों और यूनियनों के बीच बातचीत के बाद अगले हफ्ते की 48 घंटों की हड़ताल टाल दी है. विभिन्न यूनियनों और अधिकारियों के बीच रात भर बातचीत हुई जिसके बाद मंगलवार और बुधवार को होने वाली हड़ताल को टाला गया है. यूनियनों का कहना है कि बीबीसी ने निजीकरण के मुद्दे पर उनकी कई मांगों को माना है लेकिन नौकरियों में कटौती को लेकर कोई ख़ास प्रगति नहीं हो सकी है. मंगलवार को सभी यूनियन एक बार फिर बैठक करेंगे और अपने अगले कदम यूनियन के प्रतिनिधियों और बीबीसी के डाइरेक्टर जनरल मार्क थाम्पसन के बीच 20 घंटे बातचीत हुई जिसके बाद हड़ताल टालने का फैसला किया गया. नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, बेकटू और एमिकस यूनियन द्वारा जारी संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया है कि बीबीसी की यूनियनें इस बात पर राज़ी हुई हैं कि बीबीसी के प्रस्तवों को अगले मंगलवार को विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों के समक्ष रखा जाए. बयान के अनुसार बीबीसी के प्रस्ताव मान लेने का कोई आश्वासन यूनियनों ने नहीं दिया है लेकिन इस पर सभी की राय लेने और सद्भावनापूर्ण रवैया अपनाते हुए हड़ताल टाल दी है. हालांकि बयान में कहा गया है कि अगर बीबीसी के प्रस्तावों पर सहमति नहीं बनी तो फिर से हड़ताल करने का अधिकार यूनियनों के पास है. बीबीसी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिकारी स्टीफन डांडो ने कहा " बीबीसी इस विवाद को सुलझाने के पक्ष में है.हम हड़ताल टालने के यूनियनों के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. " उन्होंने कहा कि बीबीसी ने यूनियन के सदस्यों के साथ बैठक के दौरान लचीला रवैया अपनाने और उनकी चिंताओं को समझने की कोशिश की और उम्मीद है कि आने वाले समय में यूनियनों के साथ बेहतर तालमेल बन सकेगा. |
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