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बीबीसी में 24 घंटे की हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नौकरियों में कटौती के प्रबंधन के फ़ैसले के ख़िलाफ़ चौबीस घंटे की हड़ताल के बाद बीबीसी के कर्मचारी और पत्रकार अपने काम पर लौट आए हैं. हड़ताल की वजह से बीबीसी के कामकाज और कार्यक्रमों के प्रसारण में बाधा आई. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हड़ताल के लिए उन्हें पूरी तरह से ठोस समर्थन मिला जबकि बीबीसी का कहना है कि लगभग साठ प्रतिशत कर्मचारी आम दिनों की तरह काम पर आए. बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉमसन का कहना है कि नौकरियों में कटौती का फ़ैसला सही है, उन्होंने कहा कि वे कर्मचारी संगठनों से राय मशविरा करने को तैयार हैं. बीबीसी प्रबंधन लगभग चार हज़ार नौकरियों की कटौती करना चाहती है जबकि श्रम संगठनों का कहना है कि इन कटौतियों से बीबीसी का नुक़सान होगा और उनकी माँग है कि किसी कर्मचारी को उसकी इच्छा के विरूद्ध नौकरी से न हटाया जाए. यूनियनों का कहना है कि बीबीसी के इतिहास में इतनी ज़्यादा कटौतियाँ पहले कभी नहीं हुईं और ये बीबीसी के लिए घातक साबित होंगी जबकि बीबीसी प्रबंधकों का कहना है कि मीडिया बाज़ार के बदलते रूप और बढ़ती प्रतियोगिता को देखते हुए छंटनी ज़रूरी है ताकि बचने वाला पैसा कार्यक्रमों की बेहतरी पर लगाया जा सके. बीबीसी के कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रबंधक गंभीरता से उनकी बात सुनने और दूसरे विकल्प तलाश करने के लिए तैयार नहीं थे इसलिए हड़ताल की नौबत आई जबकि प्रबंधकों का कहना है कि वे बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर प्रबंधन के रूख़ में बदलाव नहीं आता है तो 31 मई और एक जून को 48 घंटे की हड़ताल होगी. |
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