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बीबीसी में तीन दिन की हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के कर्मचारियों ने नौकरियाँ कम करने के प्रबंधन के निर्णय के विरूद्ध 23 मई, 31 मई और 1 जून को 24 घंटे की हड़ताल करने का फ़ैसला किया है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि चौथे दिन की हड़ताल की घोषणा भी की जाएगी ताकि "कामकाज में अधिकतम व्यवधान डाला जा सके." कर्मचारी संगठन बीबीसी में साढ़े तीन हज़ार से अधिक लोगों की नौकरियाँ ख़त्म करने और कुछ विभागों का निजीकरण का विरोध कर रहे हैं. तीन प्रमुख ट्रेड यूनियनों--एमिकस, एनयूजे और बेक्टू--ने इन कटौतियों को बीबीसी के इतिहास का सबसे नुक़सानदेह निर्णय बताया है. बीबीसी प्रबंधन ने इन हड़तालों के बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, बीबीसी प्रबंधन का कहना रहा है कि नौकरियों में कटौती से लाखों पाउंड की बचत होगी जिसे बीबीसी की कुशलता बढ़ाने के लिए निवेश किया जाएगा. बीबीसी प्रबंधन कार्यक्रमों में रूकावटों को न्यूनतम रखने के प्रयास करेगा लेकिन बेक्टू ने इससे पहले कहा था कि वह चाहेगी कि ना तो टीवी के पर्दों पर कुछ दिखे और ना ही रेडियो पर कुछ सुना जा सके. बेक्टू ने कहा है कि वह इस बात का पूरा ध्यान रखेगी कि जो भी कार्यक्रम हों उन पर हड़ताल के कारण बुरा असर पड़े. बीबीसी ने कहा है,"बीबीसी को जैसे बदलावों की आवश्यकता है और जिस तरह से श्रम संगठनों ने हमें बात नहीं करने दिया उससे हमें मतदान के बाद आए फ़ैसले पर कोई आश्चर्य नहीं है". एनयूजे के महासचिव जेरेमी डियर ने कहा,"छँटनी की योजना बड़े गंदे तरीक़े से सोची गई है जिससे गुणवत्ता और स्तर को अपूरणीय क्षति होगी". दूसरी ओर बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉम्पसन ने ये दलील दी है कि नौकरियों में प्रस्तावित कटौतियों से हर साल 35 करोड़ पाउंड की बचत होगी जिसे कार्यक्रमों में लगाया जा सकेगा. |
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