|
बीबीसी में चौबीस घंटे की हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी में हज़ारों नौकरियाँ कम करने के प्रबंधन के फ़ैसले के विरोध में रविवार मध्य रात्रि से बीबीसी के पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों ने 24 घंटे की हड़ताल शुरु कर दी है. यूनियन के नेताओं का कहना है कि हज़ारों पत्रकार और कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं. बीबीसी प्रबंधन का कहना है कि यूनियन के फ़ैसले से उन्हें खेद है लेकिन वो अपने कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए हर संभव प्रयास करेगा. समझा जा रहा है कि रेडियो, टेलिवीजन और ऑनलाइन से जारी समाचार और कार्यक्रमों के प्रसारणों पर इसका ख़राब असर रहेगा. यूनियन के नेताओं का मानना है कि बीबीसी रेडियो और टेलिविजन के कई प्रमुख कार्यक्रमों का प्रसारण नहीं हो पाएगा और चौबीसों घंटे चलने वाले समाचार प्रसारण भी काफ़ी हद तक प्रभावित होंगे. इस हड़ताल का आयोजन कर रही तीन यूनियनों, नैशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट, बेक्टू और ऐमिकस का मानना है कि बीबीसी के सत्ताइस हज़ार पत्रकार और कर्मचारियों में से लगभग ग्यारह हज़ार लोग हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं. यूनियन का कहना है कि आने वाले तीन सालों में लगभग चार हज़ार नौकरियां कम करने की बीबीसी की योजना मनमानी कार्रवाई है और इससे बीबीसी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता प्रभावित होगी. लेकिन बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉम्पसन का कहना है कि कटौतियाँ तकनालाजी में आ रहे बड़े परिवर्तनों के साथ चलने के लिए आवश्यक हैं और इन से बचाए गए पैसे कार्यक्रमों में ही लगाए जाएँगे. बीबीसी प्रबंधन ने यूनियनों से कहा है कि हड़ताल की वजह से आम जनता के साथ उसके संबंध ख़राब होंगे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||