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अब भी 31 लोग लापता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि गुरुवार को हुए बम धमाकों के बाद अब भी 31 लोगों का कोई अता-पता नहीं है. वहीं भूमिगत रेल से भी कई शव निकाले गए हैं. बाक़ी शव निकालने का काम लगातार जारी है. पुलिस अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वो सोमवार को काम पर लौट आएँ. पुलिस ने सहयोग देने के लिए नागरिकों का शुक्रिया भी अदा किया. अधिकारियों ने अपील की है कि अगर किसी के पास तस्वीरों के रूप में कोई सुबूत है तो वो पुलिस को सौंप दे, बहुत सारे लोगों ने अपने मोबाइल फ़ोन के कैमरों से धमाके के तुरंत बाद तस्वीरें खींची हैं. इस बीच सरकारी अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अभी तक मारे गए लोगों के नामों की सूची सोच-समझकर ही जारी नहीं की गई है. उन्होंने कहा है कि मृतकों के रिश्तेदारों को किसी तरह की सूचना देने से पहले ये आवश्यक है कि शवों की सही शिनाख़्त कर ली जाए. बड़े आयोजन उधर लंदन में हुए बम धमाकों के बाद पहली बार बड़े आयोजन हो रहे हैं.
दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के 60 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में लोग हिस्सा ले रहे हैं. ब्रिटेन की महारानी एलिज़बेथ लंदन के वेस्टमिंस्टर ऐबे में एक समारोह में शामिल हुईं जिसे लोगों ने टेलीविज़न पर देखा. वहीं लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स स्टेडियम में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच आज क्रिकेट मैच भी खेला गया. इनके अलावा किंग्स क्रॉस स्टेशन के पास ही एक चर्च में रविवार को मारे गए लोगों की याद में एक प्रार्थना सभा भी हुई है जिसमें सैक़ड़ों लोग शामिल हुए. जाँच इस बीच धमाकों के बारे में बड़े पैमाने पर जाँच जारी है और पुलिस तथा फ़ोरेंसिक विभाग के लोग सबूत एकत्र कर रहे हैं. पुलिस ने कहा है कि जो विस्फोटक प्रयोग किए गए थे वे घर में बनाए हुए विस्फोटक नहीं थे, लेकिन ये पता नहीं है कि इसे इस्तेमाल करने वाले ब्रिटेन के निवासी थे या बाहर के. इस बीच लंदन पुलिस के एक पूर्व प्रमुख ने कहा है कि लंदन में हुए धमाकों के पीछे ऐसे चरमपंथियों का हाथ हो सकता है जो ब्रिटेन के ही निवासी हैं. मेट्रोपोलिटन पुलिस के पूर्व पुलिस आयुक्त लॉर्ड स्टीवंस ने अख़बार 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' को एक इंटरव्यू में बताया है कि ऐसा समझा जाता है कि ब्रिटेन में जन्मे या बसे हुए लगभग 3,000 लोगों को अल-क़ायदा के शिविरों में प्रशिक्षण दिया गया है. |
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