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दारफ़ुर में बड़े अपराधों के सबूत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में मुख्य अभियोजक ने कहा है कि उनके पास इस बात के ठोस और महत्वपूर्ण सबूत हैं कि सूडान के दारफ़ुर इलाक़े में गंभीर अपराध हुए हैं. उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस बात के सबूत हैं कि दारफ़ुर में हज़ारों हत्याएँ और बलात्कार हुए हैं. उन्होंने ये बातें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मुख्य अभियोजक लुई मोरीनो ओकैंपो की बात कई लोगों को शायद नई न लगे क्योंकि इस तरह की ख़बरें मीडिया में लंबे समय से आती रही हैं, लेकिन बड़ी बात है उनका ये दावा कि उनके पास इस बात के ठोस और महत्वपूर्ण सबूत हैं. इसी साल मार्च में संयुक्त राष्ट्र ने फ़ैसला किया कि सूडान में दो साल से जारी हिंसा की विस्तार से जाँच अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत को करनी चाहिए. तभी से अदालत के मुख्य अभियोजक मोरीनो ओकैंपो इसके बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहे थे. ओकैंपो ने आरोप लगाया है कि इन गंभीर कृत्यों के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सूडान सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है. दूसरी तरफ़, सूडान के न्याय मंत्री अली मोहम्मद उस्मान यासीन ने इसके जवाब में कहा है कि सूडान में अलग अलग मामलों में दस लोगों के ख़िलाफ़ सुनवाई हो रही है. यासीन का कहना था कि सूडान अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत की जाँच में मदद के लिए तैयार है लेकिन वो लोगों के ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई के लिए उनके प्रत्यर्पण करने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने कहा “इस वक़्त तो हम इसके लिए तैयार नहीं हैं. हमारा कहना है कि हमें नहीं लगता कि किसी का भी प्रत्यर्पण करने की ज़रूरत है.” अब देखना है कि सूडान सरकार के सीधे सीधे विरोध के बाद अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत और सुरक्षा परिषद क्या क़दम उठाती है क्योंकि प्रत्यर्पण के बिना किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ सुनवाई करना संभव नहीं होगा. |
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