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दारफ़ुर में भय का माहौल है | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त लुईज़ आर्बर ने कहा है कि सूडान के दारफ़ुर इलाक़े में संघर्ष के कारण कोई 10 लाख लोग भय के वातावरण में शरणार्थी जीवन जी रहे हैं. उन्होंने कहा है कि दारफ़ुर इलाक़े में संघर्ष की वजह से जो औरतें बेघर हो गई हैं उन्हें बलात्कार और यौन हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है. लुईज़ आर्बर ने कहा कि सूडान सरकार देश में हो रहे बलात्कारों को भी छुपाने का प्रयास कर रही है. लुईज़ आर्बर संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों और विदेशी दूतों की उस लंबी कतार में शामिल हैं जिन्होंने सूडान का दौरा किया है और सरकार द्वारा दारफ़ुर संकट से निबटने की तरीक़े की भर्तस्ना की है. दारफ़ुर क्षेत्र के हफ़्ते भर के अपने इस दौरे के बाद लूईज़ आर्बर ने कहा कि 18 महीनों की लड़ाई के बाद बेघर हुए लोग ऐसे शिविरों में रह रहे हैं जो जेल से कम नहीं हैं. उन्होंने वहाँ अतिरिक्ति मानवाधिकार पर्यवेक्षकों को नियुक्त किए जाने की भी माँग की. उन्होंने कहा कि शरणार्थी घर जाने के बारे में सोच नहीं पा रहे क्योंकि उन्हें प्रशासन पर सुरक्षा का भरोसा नहीं है. सच्चाई से दूर दावे दारफ़ुर में सुरक्षा की स्थिति के बारे में आर्बर ने कहा, " बदक़िस्मती से मैंने पाया है कि सरकार के दावों और ज़मीनी सच्चाई में फ़र्क हैं." "सरकार का कहना है कि इन लोगों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई है और इसलिए अब सुरक्षा है लेकिन जिन लोगों के लिए यह सुरक्षा की गई है वे ऐसा नहीं बिल्कुल नहीं मानते हैं." हालांकि सूडान सरकार का ध्यान इस संयुक्त राष्ट्र दौरे पर कम और तथाकथित तख़्तापलट के षडयंत्र पर ज़्यादा था. सैनिक कुछ सरकारी इमारतों पर पहरा दे रहे हैं और सड़कों पर ट्रैफ़िक रोका गया है. मंत्रियों का कहना है कि कई षडयंत्रकारियों को बंदी बनाया गया है, जिनमें दो सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं, और सैंकड़ो हथियार बरामद किए गए हैं. सरकार ने एक विपक्षी पार्टी पर इस योजना का आरोप लगाया है लेकिन विपक्षी गुटों का कहना है कि दारफ़ुर की समस्यायों से ध्यान हटाने के लिए सरकार यह दावे कर रही है. 2003 की शुरूआत से लेकर अब तक दारफ़ुर क्षेत्र में पचास हज़ार लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से ज़्यादा बेघर हुए हैं. सूडान के इस सूखे और ग़रीब पश्चिमी इलाक़े में विद्रोहियों का कहना है कि सरकार अश्वेत अरब लोगों के साथ भेदभाव करती हैं और उनके सफ़ाए में लगी जंजावीड़ लड़ाकुओं का साथ देती है. |
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