| दारफ़ुर पर संयुक्त राष्ट्र का कड़ा तेवर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूडान के दारफ़ुर में सुरक्षा व्यवस्था की हालत सुधारने को लेकर संयुक्त राष्ट्र की समयसीमा सोमवार को ख़त्म हो रही है. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार समर्थक लड़ाके हथियार नहीं डालते तो सूडान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. दारफ़ुर में हुई हज़ारों लोगों की हत्या के लिए सरकार समर्थक लड़ाकों को ही ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दारफ़ुर में अभी भी असुरक्षा का माहौल है और लोगों का पलायन भी जारी है. नाइज़ीरिया ने दारफ़ुर में संघर्षविराम की निगरानी कर रहे पर्यवेक्षकों की सुरक्षा के लिए अपने सैनिकों को भेजा है. सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ्रीकी संघ के सुरक्षा दल के अंग के रूप में दारफ़ुर भेजे जा रहे नाइज़ीरिया के सैनिक रवांडा के डेढ़ सौ सैनिकों के साथ काम करेंगे.
सूडान सरकार और विद्रोहियों के बीच अप्रैल में संघर्षविराम पर समझौता हुआ था लेकिन तभी से दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर इसके उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं. दारफ़ुर में अभी भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. दक्षिणी दारफ़ुर में कई शिविरों में हज़ारों बीमार और कुपोषण के शिकार लोग अभी भी डर के माहौल में जी रहे हैं. औरतों को ये डर है कि कभी भी विद्रोही उनका बलात्कार कर सकते हैं और आम लोग भी ये मानते हैं कि अगल वे अपने शिविर से बाहर निकले तो उन्हें मारा पीटा जाएगा या फिर मौत के घाट उतार दिया जाएगा. खाद्य सामग्री के वितरण की हालत में सुधार है लेकिन अभी भी कई ऐसे इलाक़े हैं जहां कोई अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं पहुँच पा रही है. विद्रोही गुटों ने ताज़ा हमलों की शिकायत की है और सरकार विद्रोहियों पर संघर्षविराम तोड़ने का आरोप लगा रही है. |
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