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दारफ़ुर में जनसंहार हो रहा है: अमरीका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सूडान के दारफ़ुर इलाक़े में चल रही मार-काट को ‘जनसंहार’ कहा है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि वहाँ संयुक्त राष्ट्र को वहाँ हस्तक्षेप करना चाहिए और प्रतिबंध लगाने की पहल करनी चाहिए. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसे जनसंहार मानने से इंकार किया था. प्रस्ताव का मक़सद है कि अमरीका सूडान की बिगड़ती स्थिति को रोकने के लिए सभी देशों का नेतृत्व करते हुए कुछ क़दम उठाए. अफ़्रीका में अमरीका का अनुभव ख़ासा दर्दनाक रहा. सोमालिया में बिगड़ती स्थिती पर ध्यान न देने से अमरीका को जान-माल का ख़ासा नुकसान हुआ था. इसके 10 साल पहले अफ़्रीका के देश रूवांडा में जनसंहार को रोकने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने न के बराबर कोशिश की थी. रूवांडा में 1994 में हुए जनसंहार में आठ लाख लोग मारे गए थे. उस समय अमरीका की कड़ी आलोचना हुई थी. विशेषज्ञों के अनुसा अब बुश प्रशासन चाहता है कि वो ग़लतियाँ दोबरा न हों. साल भर पुराना संघर्ष दारफ़ुर में संघर्ष का आरंभ साल भर पहले तब हुई जब विद्रोहियों के गुट ने सरकारी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया. विद्रोहियों का आरोप था कि सूडान सरकार अरबों के मुक़ाबले अश्वेत अफ़्रीकियों पर ध्यान नहीं दे रही है.
इस इलाक़े में दोनों प्रमुख समुदायों के बीच ज़मीन और चारागाहों को लेकर भी विवाद रहा है. अश्वेत अफ़्रीकियों के दो गुट सूडान लिबरेशन आर्मी और जस्टिस एंड इक़्वलिटी मूवमेंट इस इलाक़े में सक्रिय रहे हैं. सूडान सरकार पर आरोप है कि उसने इन गुटों के ख़िलाफ़ जंजावीड नामक अरब मिलिशिया को शह दी. |
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