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दारफ़ुर पर कोफ़ी अन्नान की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वह सूडान के हिंसाग्रस्त इलाक़े दारफ़ुर के मामले में अमरीकी प्रस्ताव के मसौदे पर तुरंत कार्रवाई करे. अन्नान ने कहा कि अभी भी नागरिकों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा में कोई कमी नहीं आई है. इस महीने के शुरू में अमरीका ने दारफ़ुर में संघर्ष ख़त्म करने के लिए एक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया था जिसमें सूडानी सरकार पर दबाव की बात कही गई थी. प्रस्ताव में अफ़्रीकी संघ की सेना को तैनात करने की भी बात है जो वहाँ निगरानी के लिए रखी जाएगी. प्रस्वात में कहा गया है कि अगर सूडान सरकार प्रस्तावों का पालन नहीं करती तो प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. अमरीकी प्रस्ताव में इसका भी उल्लेख है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एक अंतरराष्ट्रीय आयोग का गठन करें जो दारफ़ुर में मानवाधिकार हनन की जाँच करे. अमरीका का कहना है कि वह चाहता है कि इस प्रस्ताव पर शनिवार तक मतदान हो जाए लेकिन चीन सहित कुछ सदस्य देशों ने प्रस्ताव में पाबंदी की धमकी का विरोध किया है. अन्नान ने सुरक्षा परिषद से तुरंत कार्रवाई की अपील करते हुए कहा, "सुरक्षा परिषद बिना देर किए इस मामले पर कार्रवाई करे और सदस्य देश इस संकट से निपटने के लिए एकजुट होकर काम करें." उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सूडानी सरकार और विद्गोहियों पर राजनीतिक समझौते और संघर्ष ख़त्म करने के लिए दबाव दे. संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन डैनफ़ोर्थ ने कहा है कि इस समय तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है. लेकिन चीन के राजदूत वांग गुवांगिया का कहना है कि अभी भी प्रस्ताव के मसौदे में कुछ समस्याएँ हैं. उन्होंने कहा, "इस समय ऐसे प्रस्ताव की ज़रूरत है जो मसले के हल में सहायता करे ऐसे प्रस्ताव की ज़रूरत नहीं जिससे हालात और बिगड़ जाएँ." सूडान सरकार ने अमरीका प्रस्ताव को असंतुलित और अन्यायपूर्ण बताया है. फरवरी से पश्चिमी सूडान के इलाक़ों से 10 लाख से ज़्यादा लोगों ने पलायन किया है. ख़तरनाक आँकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों के मुताबिक़ क़रीब 10 हज़ार लोग हर महीने बीमारी से मर रहे हैं.
इस बीच सरकार और विद्रोहियों के बीच नाइज़ीरिया की राजधानी अबुजा में हो रही शांति वार्ता कम से कम तीन सप्ताह के लिए रद्द कर दी गई है. एक विद्रोही गुट 'जस्टिस एंड ईक्वलिटी मूवमेंट' ने तो बातचीत के टूट जाने की बात कही है. लेकिन एक अन्य गुट सूडान लिबरेशन आर्मी ने कहा है कि वे शुक्रवार तक इंतज़ार करेंगे और उसके बाद ही कोई आख़िरी फ़ैसला करेंगे. बातचीत में रुकावट इस बात को लेकर आई है कि सरकार समर्थक जंजीवाद विद्रोहियों के साथ ही संघर्ष में लगे विद्रोही भी हथियार डाल दें. सरकार का कहना है कि विद्रोहियों ने ही संघर्ष की शुरुआत की है इसलिए उन्हें भी साथ-साथ हथियार डालना चाहिए. सरकार जंजीवाद विद्रोहियों को समर्थन देने की बात से इनकार करती है. इस साल फरवरी में दारफ़ुर में हिंसा शुरू हुई थी. विद्रोहियों का कहना था कि सरकार इस इलाक़े की अनदेखी कर रही है. |
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