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'दारफ़ुर की हिंसा जनसंहार है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के विदेशमंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि सूडान के दारफ़ुर क्षेत्र में हो रही हत्याएं जनसंहार ही कहलाएँगी. कॉलिन पॉवेल ने अमरीकी संसद की विदेश संबंध समिति के सामने कहा कि यह निष्कर्ष दारफ़ुर से बच कर भागे शरणार्थियों के साथ हुई बातचीत के आधार पर निकाला गया. उनका यह बयान तब आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सूडान के ख़िलाफ़ दूसरा प्रस्ताव लाने की तैयारी हो रही है. अमरीका द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के मसौदे पर गुरुवार शाम को बहस होनी है. दारफ़ुर में चल रही हिंसा में अब तक लगभग 50 हज़ार लोग मारे गए हैं और दस लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं. डारफ़ुर क्षेत्र में सरकार समर्थक अरब मिलीशिया जंजाविद और विद्रोहियों के बीच लंबे अरसे से संघर्ष चल रहा है. इस नए प्रस्ताव में यह प्रावधान हो सकता है कि अगर सूडान वहाँ हिंसा रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाता तो उसके ख़िलाफ़ तेल बिक्री पर रोक जैसे आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएँ. पॉवेल का बयान कॉलिन पॉवेल का सूडान में हिंसा को जनसंहार करार देना इस विषय में कूटनीतिक बहस को प्रभावित कर सकता है. कॉलिन पॉवेल ने कहा है,"हमारा निष्कर्ष यह है कि डारफ़ुर में हुए जनसंहार के लिए सूडान सरकार और सरकार समर्थक जंजाविद मिलीशिया ज़िम्मेदार है. आशंका है कि जनसंहार वहाँ अभी भी जारी है." अमरीका में बीबीसी संवाददाता जिल मैग्वेरिंग का आकलन है कि विदेशमंत्री द्वारा दारफ़ुर हिंसा को जनसंहार करार देने से अमरीका पर कानूनी तौर पर उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने बंदिश नहीं है लेकिन इससे उस पर नैतिक और राजनीतिक दबाव ज़रूर पड़ेगा. प्रस्ताव और प्रतिबंध अमरीका द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश किए गए नए प्रस्ताव में कहा गया है कि सूडान ने जुलाई में सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव का पालन नहीं किया. जुलाई में पारित किए गए प्रस्ताव में सूडान सरकार से मांग की गई थी कि वो सरकार समर्थक अरब मिलीशिया को निरस्त्र करे. अब नए अमरीका ने ताज़ा प्रस्ताव के मसौदे में कहा है कि अगर सूडान पिछले प्रस्ताव का पालन नई अंतिम तिथि तक नहीं करता तो उसके तेल उद्योग पर प्रतिबंध लगाए जाएँ. सूडान का तेल उद्योग प्रतिदिन लगभग तीन लाख बीस हज़ार बैरल तेल उत्पाद करता है. अमरीकी प्रस्ताव में सूडान में तैनात अफ्रीकी संघ के 300 सैनिकों की संख्या बढ़ाने और उनके अधिकार बढ़ाने की भी माँग की गई है. साथ ही इस प्रस्ताव में सूडान में अंतरराष्ट्रीय हवाई निगरानी और दारफ़ुर में सूडान के विमानों की उड़ानों पर रोक लगाने की माँग भी रखी गई है. |
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