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मंगलवार, 01 फ़रवरी, 2005 को 08:17 GMT तक के समाचार
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'दारफ़ुर में सैनिकों का अत्याचार'
दारफ़ुर के लोग
दारफ़ुर में हज़ारों लोग अपने घर छोड़कर भागने को विवश हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने सूडान की सरकार और सरकार समर्थित चरमपंथियों पर दारफ़ुर में आम लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है लेकिन उसने इस हिंसा को जनसंहार नही कहा है.

सूडान पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत में मामला चलाया जाए.

अगर संयुक्त राष्ट्र इस हिंसा को जनसंहार की संज्ञा देता तो उसे इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी पड़ती.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सूडान के पश्चिमी क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन की गंभीर घटनाएं हुई हैं.

सूडान में हो रही हिंसा के कारण 70000 से अधिक लोग मारे गए हैं और पिछले दो साल में क़रीब 20 लाख लोग दारफ़ुर से अपने घर छोड़कर भागे हैं.

जनसंहार की मंशा

अक्तूबर महीने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस रिपोर्ट पर काम करना शुरु किया था और संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान से कहा था कि एक आयोग बनाया जाए जो मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं की जांच करे.

पांच सदस्यीय आयोग ने जांच में पाया कि सूडान की सरकार और सेना ने लोगों पर बेवजह हमले किए और हत्याएं की.

रिपोर्ट के अनुसार सेना ने न केवल आम लोगों की हत्या की बल्कि गांवों को उजाड़ा, बलात्कार किया, यौन उत्पीड़न और कई ऐसे काम किए जो मानवाधिकार का सीधा उल्लंघन है.

आयोग का कहना है कि सूडानी सरकार ने जनसंहार की नीति का अनुसरण नहीं किया है लेकिन दारफुर में मानवता के ख़िलाफ जो अपराध हुए हैं वो जनसंहार से कम नहीं है.

इसमें कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों ने भी ऐसे काम किए है जो जनसंहार से कम नहीं है.

आयोग को ऐसे सबूत भी मिले हैं कि विद्रोही सैनिकों ने ऐसे अपराध किए जिसे सीधे सीधे युद्घ अपराध की संज्ञा दी जा सकती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दारफुर की समस्या को अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत में ले जाया जाए.

हालांकि अमरीका पहले ही कह चुका है कि दारफुर में जनसंहार हुआ है.

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