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सूडान में ऐतिहासिक समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूडान में सरकार और विद्रोहियों के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ है ताकि अफ्रीका के सबसे पुराने गृह युद्ध को समाप्त किया जा सके. केन्या की राजधानी नैरोबी में एक समारोह में इस समझौते की औपचारिक घोषणा हुई. समारोह में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो म्बेकी और अमरीकी विदेश मंत्री कोलिन पावेल मौजूद थे. क़रीब 50 साल पहले सूडान के उत्तर में रहने वाले ईसाई समुदाय और दक्षिण के मुस्लिम समुदाय के बीच संघर्ष शुरु हुआ था. दशकों चले इस संघर्ष में दस लाख से अधिक लोग मारे गए हैं. इस शांति समझौते में दारफुर में हाल में शुरु हुआ संघर्ष शामिल नहीं है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान ने चेतावनी दी है कि दारफुर की हिंसा पूरे देश के लिए मंहगी पड़ सकती है. ख़बरें हैं कि दारफुर में सरकार समर्थित चरमपंथी हज़ारों विद्रोहियों की हत्या कर रहे हैं. समारोह में मौजूद कॉलिन पॉवेल ने कहा कि उत्तर और दक्षिण के बीच इस समझौते से दारफुर संकट को सुलझाने में मदद मिलेगी. दक्षिण के मुख्य विद्रोही नेता जॉन गरंग ने कहा कि सरकार में शामिल होने के बाद उन्हें उम्मीद है कि दारफुर शांति प्रक्रिया में उन्हें भी बुलाया जाएगा. गरंग और सूडान के राष्ट्रपति उमर बद बशीर रविवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. बीबीसी के नैरोबी संवाददाता इशबेल मैथसन का कहना है कि केन्या की सरकार इस समझौते से इतनी खुश है कि आम लोगों को भी समारोह में शामिल कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि जैसे ही समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, न केवल पूरे सूडान में लोग खुशियां मना सकेंगे बल्कि आस पास के देशो को भी खुशी होगी. |
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